Barabanki News… पिछले दिनों आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) (एएसपी के) के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण के गोंडा जाते समय हुए घटनाक्रम ने जिले में पार्टी के संगठन में नई जान फूंक दी है। साथ ही चंद्रशेखर रावण के सजातीय वोटों में नए और सशक्त नेतृत्व की उम्मीद भी जाग गई हैं। ऐसे में जिले में नए सियासी समीकरण बनने के आसार हैं। इससे सबसे बड़ा झटका बीएसपी को लगेगा। इससे जहां बीएसपी उम्मीदवारों के लिए अपनी जमानत बचाना आसान नहीं होगा, वहीं इंडिया ब्लॉक की मुश्किलें भी इससे और बढ़ जाएंगी।
रविवार को एएसपी (के) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण को गोंड़ा जाने से रोकने की पुलिस की कोशिश और कथित पथराव उनकी पार्टी को जबरदस्त ऑक्सीजन दे गया। चंद्रशेखर रावण ने इस घटना को अपने लिए अवसर बनाया और जबरदस्त मुस्तैदी दिखाई। घंटों तक पुलिस को छकाया और ये दिखा दिया कि कमजोर और शोषितों की लड़ाई के लिए ना तो उनके पास समय की कमी है और ना ही साहस की। पूरा दिन संघर्ष के बाद उनके साथ जबरदस्त भीड़ भी दिखाई दी। जिस दर्जे की भीड़ उनके साथ नजर आई। उसने जिले के साथ प्रदेश में एक नई सियासी समीकरण और माहौल सुगबुगाहट दी है। जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित बहुजन समाज पार्टी होगी, क्यूंकि रावण की सबसे बड़ी सेंधमारी बीएसपी कैडर में होने वाली है। हालांकि इससे इंडिया ब्लॉक भी अछूता नहीं रहेगा।
दरअसल चंद्रशेखर रावण के 2024 में नगीना से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से लगातार पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं। वो लगातार अनुसूचित जाति और मुस्लिम समाज के मुद्दों को लेकर मुखर रहते हैं। और भी जनसामान्य के मुद्दों को लेकर वो पीछे नहीं रहते और जी जान से लगे रहते हैं। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उनकी बहस के तमाम वीडियो वायरल हैं। चंद्रशेखर नवजवान भी हैं और यूपी में एक नए विकल्प को पैदा करने की कूवत भी रखते हैं। इसलिए उनके साथ लगातार लोग जुड़ रहे हैं। मायावती के कई पुराने साथी भी उनकी पार्टी में हैं। साथ ही सपा-कांग्रेस से दूरी बनाए रहने वाले मुस्लिम और दूसरे समाज के लोग भी चंद्रशेखर के बाजुओं को मजबूत करने में लगे हुए हैं। क्यूंकि उन्हें ये लगता है कि सुस्त पड़ी मायावती के कैडर को सजातीय चंद्रशेखर अपने पाल में लाने का दम रखते हैं। ये बात काफी हद तक सही भी है। ऐसे में अगर चंद्रशेखर अपने दम से बीएसपी कैडर में थोड़ी बहुत ही सेधमारी कर लेते हैं, तो बीएसपी उम्मीदवारों के लिए जमानत बचाना आसान नहीं होगा।
चंद्रशेखर की सक्रियता इंडिया ब्लॉक के लिए इसलिए घातक साबित होगी क्यूंकि प्रदेश में एक वर्ग ऐसा है, जो सपा-कांग्रेस गंठबंधन से अलग एक विकल्प तलाश रहा है और चंद्रशेखर उनकी आकाक्षाओं को पूरा करने की कूवत रखते हैं। बस बात उनकी रजामंदी की है। लंबे समय से कई मंचों पर चंद्रशेखर के ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ गठबंधन की मांग उठती रही है। अगर इस मांग पर दोनों नेता विचार करते हैं, तो यूपी में बाइपोलर लड़ाई की चाह रखने वाले इंडिया गठबंधन के मनसूबों पर पानी फिरेगा। क्यूंकि ओवोसी और चंद्रशेखर का गठबंधन मुस्लिम और एससी-एसटी वोटों में सेधमारी करके एकला चलो की नीति पर चल रहीं मायावतची और इंडिया गठबंधन को बड़ा डेंट देगा। जिसके बाद दोनों के पास हाथ मलने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं होगा।

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