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Barabanki: प्रतिस्पर्धी और तेजी से बदलते युग में नैतिक मूल्यों और आधुनिक ज्ञान का समन्वय शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता-विजय तिवारी

 

Barabanki News... श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRMU) के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा ‘समग्र विकास और शिक्षा की भूमिका’ विषय पर शुक्रवार को एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के चांसलर इं. पंकज अग्रवाल, प्रो-चांसलर इं. पूजा अग्रवाल तथा शैक्षणिक सलाहकार आरुषी अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल साइंस एंड ह्यूमैनिटीज़ के डायरेक्टर एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) बी. एम दीक्षित, रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) हिमेंद्र शर्मा, कॉमर्स एवं इकोनॉमिक्स की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. वीना सिंह, आईक्यूएसी की डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) ऋतु चंद्रा, परीक्षा नियंता प्रो. (डॉ.) अकांक्षा निगम, प्रो. (डॉ.) अभिषेक सक्सेना समेत सभी इंस्टिट्यूट के डीन, डायरेक्टर एवं विभागों के अध्यक्ष और शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. कुमार संभव, एसोसिएट डीन, फैकल्टी ऑफ वैल्यू एजुकेशन, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ एवं डायरेक्टर, यूपीआईडी नोएडा रहे।
इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. विजय तिवारी ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी और तेजी से बदलते युग में नैतिक मूल्यों और आधुनिक ज्ञान का समन्वय शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना या नौकरी दिलाना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। शिक्षा वह प्रक्रिया है जो व्यक्ति को बौद्धिक, शारीरिक, भावनात्मक, नैतिक तथा आध्यात्मिक रूप से संतुलित और पूर्ण मानव बनाती है। आज युवा पीढ़ी को न सिर्फ तकनीकी ज्ञान और व्यावसायिक कौशल की जरूरत है, बल्कि उनमें सत्य, अहिंसा, करुणा, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को भी विकसित करने की आवश्यकता है। शिक्षा तभी सार्थक मानी जाएगी जब वह विद्यार्थी को आत्मनिर्भर, संवेदनशील, दूरदर्शी और नैतिक रूप से मजबूत नागरिक बनाएगी। हमारा प्रयास है कि एसआरएमयू के विद्यार्थी न केवल उत्कृष्ट पेशेवर बनें, बल्कि बेहतर इंसान भी बनें जो समाज और राष्ट्र के निर्माण में सकारात्मक योगदान दे सकें। शिक्षा जीवन जीने की कला है, सिर्फ कमाने का साधन नहीं।”
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. कुमार संभव ने अपने व्याख्यान में कहा कि समग्र विकास का अर्थ केवल बौद्धिक उन्नति नहीं, बल्कि शारीरिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास का संतुलन है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को पूर्ण मानव के रूप में विकसित करना है। 

कार्यक्रम में रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) हेमेंद्र शर्मा ने कहा कि आईक्यूएसी के ऐसे प्रयास विश्वविद्यालय में गुणवत्ता आधारित और मूल्यपरक शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।

 कार्यक्रम की आयोजक संस्था आईक्यूएसी की डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) ऋतु चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि समग्र विकास शिक्षा की आत्मा है। उन्होंने कहा, आईक्यूएसी का उद्देश्य केवल शैक्षणिक मानकों को बनाए रखना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास के लिए एक सशक्त और संतुलित शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। शिक्षा तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति को ज्ञान के साथ-साथ मूल्यों, करुणा और आत्मनिर्भरता से सुसज्जित करती है।

 आयोजन समिति में प्रो. (डॉ.) वीणा सिंह, विभागाध्यक्ष, वाणिज्य एवं अर्थशास्त्र विभाग, डॉ. शिल्पा शुक्ला, एसोसिएट डायरेक्टर आईक्यूएसी, डॉ. मृ्त्युञ्जय राय, असिस्टेंट डायरेक्टर, आईक्यूएसी तथा श्री अभिषेक कुमार सक्सेना, असिस्टेंट डायरेक्टर, आईक्यूएसी शामिल रहे। सभी ने कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समन्वय में सक्रिय योगदान प्रदान किया।

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