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Barabanki: चुनौती ही चुनौती, सुस्त बैठा हाथी

 

Barabanki : राजनीति में हर किसी एक दौर होता है। ये आता है और चला जाता है। आज से करीब 20 साल पहले बहुजन समाज पार्टी का दौर भी आया था। प्रदेश की सत्ता मिली, लेकिन उसके बाद जो पतन शुरू हुआ उससे बीएसपी उभर नहीं पाई। जिले में भी बीएसपी का यही हाल है। हालत ये है कि इस वक्त बीएसपी को आदमी तक नहीं मिल रहे हैं। मिल भी रहे हैं, तो बस दूसरे दलों के उपेक्षित नेता जिनके दम पर कामयाबी की उम्मीद दूर-दूर तक नजर नहीं आती। 

समाजवादियों के गढ़ बाराबंकी जिले में इन दिनों बीएसपी कहां है, ढूढने से भी उसका सुराग नहीं मिल रहा। अपनी नीतियों और जनता से दूरी की वजह से बीएसपी संरक्षित श्रेणी में पहुंच चुकी है। एक वक्त था कि जिले में बीएपी के 4-4 विधायक होते थे। मंत्री भी हुए, लेकिन वक्त के साथ जिले के तमाम जिले के कद्दावर नेता दूसरे दलों में चले गए। अब हालत ये है कि जिले में बीएसपी का कोई ऐसा नेता है, जो बीएसपी के झंडे को आगे उठाकर जनता के मुद्दों को उठा सके। संगठन स्तर पर जिले में बीएसपी शून्य सी प्रतीत हो रही है। हालांकि कुछ टिकटार्थी हैं, जो पर्व त्योहार पर होर्डिंग के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनका जनाधार क्या है। ये बड़ा सवाल है। जिले में बीएसपी के पास इस वक्त कोई ऐसा नेता नहीं है, जिसके पीछे लोग खड़े होकर पार्टी को मजबूती प्रदान कर सकें। बीएसपी में इक्का दुक्का लोग जो लोग आ भी रहे हैं, वो दूसरे दलों से उपेक्षित हैं। उनमें कहीं न कहीं लोगों को जोड़ने की योग्यता है, लेकिन पार्टी की नीति और रीति की वजह से वो ज्यादा कुछ कर नहीं सकते। बीएसपी के अगर कुछ है, तो बस उसके कैडर का वोट, हालांकि ज्यातर लोगों का ये मानना है कि पार्टी की निष्क्रीयता की वजह से उसके कैडर में भी सेधमारी हो चुकी है। लोकसभा चुनाव में इस बात की पुष्टि होते हुए भी नजर आई। 

इन तमाम हालातों से जिले में बीएसपी का हाल बेहाल होता जा रहा है। जिले में आने वाले दिनों में भी बीएसपी के लिए चुनौतियां कम होने वाली नहीं हैं। पहली चुनौती तो उसे जिले की बाइ पोलर लड़ाई में खुद को लड़ाई में लाना है, दूसरी और सबसे अहम चुनौती जिले में उसे अपने कैड़ वोट को बचाने की है। क्यूंकि लोकसभा चुनाव में बीएसपी कैडर वोट का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस उम्मीदवार के साथ चला गया था। अब यहां से कांग्रेस का ही सांसद है और मायावती के सजातीय होने के साथ नवजवान और क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। इतना ही नहीं जिले में चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी का संगठन भी काफी सक्रिय है। ऐसे में देखना ये है कि बीएसपी जिले में किस तरह वापसी कर पाती है।

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