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Barabanki: सपा में टिकट की मार, नए दावेदारों की नैया होगी पार या दिग्गज ही मारेंगे बाजी?

 


Barabanki: जिले में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी में टिकट के लिए होर्डिंग वार का दौर जारी है। तमाम सीटों पर सपा के कार्यकर्ता अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। तमाम तरह की जुगत और सियासी चालें चली जा रही हैं, लेकिन इन तमाम कोशिशों का कितना असर आलाकमान पर होता है ये देखने वाली बात होगी, क्यूंकि जिले की छह सीटों पर अभी तक सपा के दिग्गजों का ही एडजेस्टमेंट नहीं हो पा रहा है। 

जिले में विधानसभा चुनाव के टिकट को लेकर समाजवादी पार्टी की स्थित एक आनार, सौ बीमार की तरह हो गई है। हलांकि ये हाल दूसरे दलों में भी है, लेकिन सपा में ये मामला इसलिए चौकाने वाला लगता है, क्यूंकि वहां नए लोगों को टिकट देने की परंपरा कम ही रहती है। मजबूत उम्मीदवार या सियासी कद रखने वाले व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्य को टिकट देने की परंपरा सपा में काफी पुरानी है। सियासी जानकारों की मानें, तो लगभग सभी 6 सीटों के लिए उम्मीदवार तय हैं। तीन सीटों पर सिटिंग एमएलए और बाकी तीन सीटों मे दो पर सपा के दो दिग्गज और एक सुरक्षित सीट पर एक परिवार के सदस्य का टिकट, लेकिन इसके बावजूद एक-एक सीट पर कई-कई कार्यकर्ता अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। तमाम टिकटार्थी होर्डिंग के साथ मुख्यालय में दिग्गज नेताओं के वहां बैठक से लेकर रोज विक्रमादित्य मार्ग तक सड़क नाप रहे हैं। 


 दरअसल सपा के तीन में से दो विधायकों का टिकट तकरीबन तय है। सदर और जैदपुर सीट पर आलाकमान के पास के कोई ऐसी वजह नहीं है, जिससे उनका टिकट काटा जाए। जैदपुर सीट पर गौरव राव विपरीत परिस्थितियों में लगातार दो बार और सदर सीट पर उन्हीं विपरीत परिस्थितियों में लगातार तीन बार धर्मराज सिंह यादव चुनाव जीतते आ रहे हैं। सियासी जानकारों के मुताबिक ऐसी स्थिति में इन दोनों मौजूदा विधायकों का टिकट कटने का सवाल ही नहीं होता, क्यूंकि सपा जैसी पार्टियों में उस स्तर का प्रबंधन नहीं है कि मौजूदा विधायक का टिकट काटने के बाद उससे उपजे असंतोष को व्यवस्थित किया जा सके। लेकिन पार्टी कार्यकर्ता का अपना हक है, इसलिए सबकुछ जानने के बावजूद टिकटार्थी सदर सीट पर जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ तक पैलग्गी में लगे हुए हैं। 

नवाबगंज और जैदपुर के बाद सपा के तीन दिग्गज नेताओं का सेटलमेंट होना है। इनमें एक मौजूदा विधायक भी हैं और मुस्लिम भी। सपा पर लगे तमाम तरह के मुस्लिम विरोधी आरोपों के बीच मुस्लिम विधायक फरीद महफूज का टिकट कटना भी नामुमकिन है। सियासी जानकारों के मुताबिक अगर फरीद महफूज के टिकट के साथ छेड़छाड़ तक की गई, तो इसका असर जिले की तमाम सीटों पर होगा। तो इस स्थिति में आलाकमान कोई जोखिम उठाने को तैयार नहीं होगा। लेकिन इसके बावजूद रामनगर विधानसभा सीट पर दावेदार क्षेत्र में सड़क नाप रहे हैं और होर्डिंग वार पर आमादा हैं। 

बाकी दो सीटों पर सपा के दो दिग्गज नेताओं का सेटलमेंट करना भी आलाकमान की मजबूरी है। वैसे इन दोनों नेताओं को कहां से लड़ना है इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ हैं। लेकिन इतना तो तय है कि इन दोनों नेताओं टिकट दिए बगैर सपा का ना तो पीडीए का फार्मूला पूरा होगा और ना ही एक बड़ी बिरादरी का वोट हासिल होगा। बात हो रही है राकेश कुमार वर्मा की। वो कुर्मी फेस हैं और बेनी प्रसाद वर्मा के पुत्र हैं और पिछला चुनाव भी वो कोई 250 वोटों से ही हारे थे। ऐसी सिथ्ति में राकेश वर्मा के टिकट पर कोई आंच है ही नहीं। तीन सामान्य सीटों में से उनका भी किसी एक पार टिकट होना तय है। अब ये देखना होगा कि उन्हें अपनी मनमाफिक सीट मिलती है या नहीं। 

जिले के दरियाबाद विधानसभा सीट पर दावेदारी की कहानी सबसे दिलचस्प है। दरियाबाद से 2022 में पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप ने चुनाव लड़ा था, लेकिन नतीजा सकारात्मक नहीं रहा। जिले भर में अरविंद सिंह गोप की मेहनत और उनकी चुनावी रणनीति को भी अलाकमान नजरअंदाज नहीं कर सकते, लेकिन ये सब हालात जानते हुए भी दरियाबाद सीट पर सपा में दावेदारों की लंबी लाइन है। दरियाबाद के पूर्व विधायक स्वर्गीय राजीव कुमार सिंह के बेटें रिंकू सिंह, दरियाबाद से ही पूर्व विधायक रहे राधेश्याम वर्मा के पुत्र संतोष वर्मा क्षेत्र में जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। वहीं हरख के पूर्व प्रमुख सुरेंद्र वर्मा भी इसी सीट से विधानसभा पहुंचने का ख्वाब देख रहे हैं। अब देखना है दरियाबाद में सपा का कौन नेता आबाद होता है। 

खैर टिकट की मांग और दावेदारी करना पार्टी के कार्यकर्ता का हक है और टिकट देना आलाकमान का विशेषाधिकार, लेकिन देखना ये है कि इस बार सपा इस बार नए दावेदारों पर भरोसा करती है या पुराने ढर्रे पर चलती है।

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