Barabanki News... जिले के लखनऊ-देवा रोड स्थित श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (एसआरएमयू) में कुलाधिपति इंजी. पंकज अग्रवाल एवं प्रो-कुलाधिपति इंजी. पूजा अग्रवाल के दूरदर्शी मार्गदर्शन, कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी के नेतृत्व तथा फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मधु दीक्षित के संरक्षण में फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट, इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स (IMCE) द्वारा आयोजित छह दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “रिसर्च मेथोडोलॉजी एंड एकेडमिक पब्लिशिंग: फ्रॉम प्रॉब्लम आइडेंटिफिकेशन टू स्कोपस-इंडेक्स्ड पेपर्स” का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
8 जून से 13 जून तक आयोजित की गई इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और सक्रिय सहभागिता निभाई। इनमें शिक्षक, शोधार्थी, अकादमिक विशेषज्ञ एवं युवा शोधकर्ता शामिल रहे। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता के साथ किया गया। समापन अवसर पर प्रो. (डॉ.) मधु दीक्षित ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध न केवल अकादमिक उन्नति का आधार है, बल्कि समाज और उद्योग जगत की समस्याओं के समाधान का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए शोध प्रक्रिया की बारीकियों को समझने और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध प्रकाशनों की दिशा में आगे बढ़ने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) विजय तिवारी ने शोध एवं नवाचार को उच्च शिक्षा का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित करता रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों को शोध के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने तथा समाजोपयोगी शोध कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को शोध समस्या की पहचान, शोध प्रश्नों के निर्माण, साहित्य समीक्षा, सैद्धांतिक ढांचे के विकास, शोध अभिकल्प, डेटा संग्रहण, सांख्यिकीय विश्लेषण, अकादमिक लेखन तथा स्कोपस-इंडेक्स्ड जर्नलों में शोध प्रकाशन की संपूर्ण प्रक्रिया से अवगत कराना रहा। कार्यशाला को इस प्रकार तैयार किया गया था कि प्रतिभागी शोध की अवधारणा से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध पत्र प्रकाशित कराने तक की समग्र प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से समझ सकें।
प्रथम दिवस के प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. पी.सी. मिश्रा, एसोसिएट प्रोफेसर, फैकल्टी ऑफ लॉ, एसआरएमयू ने “समकालीन अकादमिक परिवेश में शोध” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने वैश्विक शोध परिदृश्य, शोध की विभिन्न विधाओं तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध की दृश्यता बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को यह समझाया कि शोध को केवल डिग्री प्राप्ति का माध्यम न मानकर ज्ञान सृजन और सामाजिक परिवर्तन के साधन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
द्वितीय सत्र में डॉ. सचिता श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर, सिम्बायोसिस स्कूल फॉर ऑनलाइन एंड डिजिटल लर्निंग, पुणे ने शोध अंतराल (Research Gap) की पहचान, शोध समस्या निर्धारण तथा प्रभावी शोध प्रश्नों के निर्माण पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार एक सामान्य विषय को शोध योग्य समस्या में परिवर्तित किया जा सकता है।
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों को व्यवस्थित साहित्य समीक्षा, डेटाबेस सर्च तकनीक, सिद्धांत एवं अवधारणात्मक मॉडल निर्माण, परिकल्पना विकास, शोध अभिकल्प, सैम्पलिंग तकनीक, प्रश्नावली निर्माण, वैधता एवं विश्वसनीयता परीक्षण, डेटा गुणवत्ता तथा शोध नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को डेटा विश्लेषण की आधुनिक तकनीकों जैसे डिस्क्रिप्टिव स्टैटिस्टिक्स, कोरिलेशन, रिग्रेशन, एनोवा तथा स्ट्रक्चरल इक्वेशन मॉडलिंग (SEM) के उपयोग एवं रिपोर्टिंग की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यशाला में शोध पत्र लेखन की अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित IMRaD संरचना, प्रभावी शीर्षक एवं सार लेखन, की-वर्ड चयन, संदर्भन शैली, साहित्यिक चोरी की रोकथाम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग तथा अकादमिक ईमानदारी पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए।
कार्यशाला के अंतिम चरण में प्रतिभागियों को स्कोपस-इंडेक्स्ड जर्नलों का चयन, जर्नल मेट्रिक्स की समझ, प्रीडेटरी जर्नलों की पहचान, शोध पत्र सबमिशन प्रक्रिया, पीयर रिव्यू सिस्टम, संशोधन प्रक्रिया एवं प्रकाशन रणनीतियों से अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि शोध कार्य को वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित कर अधिक प्रभावशाली कैसे बनाया जा सकता है।
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में डॉ. अनुभाव तिवारी, डॉ. प्रतिभा ठाकुर, प्रो. (डॉ.) कोंडापल्ली परमेश्वर राव, डॉ. स्वाति गुप्ता, डॉ. एकता यादव, डॉ. सैयद आसिफ मेहदी, प्रो. (डॉ.) मुनीश तिवारी, डॉ. सैयद अफजल अहमद, डॉ. आमिर एजाज एवं प्रो. (डॉ.) प्राची भार्गव सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने ज्ञान एवं अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. (डॉ.) वीणा सिंह, विभागाध्यक्ष, वाणिज्य एवं अर्थशास्त्र, डॉ. सैयद आसिफ मेहदी, डॉ. आमिर एजाज, सुश्री अदिति मिश्रा सहित आयोजन समिति के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। तकनीकी एवं प्रलेखन टीम ने भी कार्यक्रम के सुचारु संचालन में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रतिभागियों का उत्साह एवं सक्रिय सहभागिता यह दर्शाती है कि शोध एवं अकादमिक प्रकाशन के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह पहल शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने तथा देशभर के शोधार्थियों एवं शिक्षकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप शोध करने के लिए प्रेरित करने में सफल रही।
प्रतिभागियों ने कार्यशाला की विषयवस्तु, विशेषज्ञों के व्यावहारिक अनुभव, संवादात्मक सत्रों एवं शोध-केंद्रित दृष्टिकोण की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी बताया।

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