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Barabanki: जिले की सियासत के महामानव फरीद, 2027 में कितने महफ़ूज़ ?

 

Barabanki: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल बनना शुरू हो गया है। मौजूदा विधायकों का जनता ने लेखाजोखा तैयार कर लिया है। सभी पार्टियों के टिकटार्थी गुणाभाग और सियासी दांवपेंच में लगे हुए हैं। जिले की रामनगर विधानसभा सीट पर भी यही हाल है। यहां मौजूदा सपा विधायक के सामने कई पार्टी विधायक टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं। साथ ही उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर भी माहौल बनाया जा रहा है। वहीं बीजेपी के कई बड़े नेता भी इस सीट पर पूरे दमखम के साथ चुनावी रण में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में जिले के सबसे मजबूत मुस्लिम लीडर के लिए सवाल उठ रहा है कि 2027 में फरीद कितने महफूज होंगे? 


जिले की रामनगर विधानसभा सीट से फरीद महफूज किदवाई तीसरी बार विधायक हुए हैं। मोदी-योगी लहर में 2022 में महज 250 वोटों से चुनाव जीतकर उन्होंने अपना सियासी लोहा मनवाया था और आलाकमान को ये संदेश दिया कि हालात कितने भी बदलने की कोशिश कर ली जाए, लेकिन उनका सियासी कद और रुतबा जिले की किसी भी सीट पर कमतर होने वाला नहीं है। फरीद विधायक बने और अपने सियासी अनुभवों के सहारे सरकार न होते हुए भी विकास कार्यों को कराने में पीछे नहीं, लेकिन इसके बावजूद वो हर तब्के की उम्मीदों पर पूरी तरह से खरे उतरने में कामयाब नहीं रहे। नतीजा ये रहा कि उनके खिलाफ एंटी इनकमबेंसी भी नजर आई। सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट औप बैनर्स के जरिए वो प्रदर्शित भी हो रही है। खैर ये तो आम बात है। एक शख्स तमाम लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर सके ये संभव भी नहीं है, लेकिन इन सबके बीच कड़वी हकीकत ये है कि रामनगर सीट जातीय समीकरण और मौजूदा सियासी हालात में उनके लिए मुफीद नहीं मानी जा रही है। यही वजह है कि हर तरफ ये अटकलें आम हैं कि वो रामनगर के बजाए अपने लिए पुरानी सीट पर वापसी चाहते हैं। कयास तो ये भी हैं कि उनकी अगर ये चाहत पूरी नहीं हुई, तो वो कोई दूसरा रास्ता भी अख्तियार कर सकते हैं। 

 दरअसल रामनगर विधानसभा ब्राहम्ण बाहुल्य क्षेत्र है। पिछला चुनाव भी वो सिर्फ 250 वोटों से किसी तरह से जीत सके थे। उन्होंने उस वक्त के बीजेपी विधायक शरद अवस्थी को कांटे के मुकाबले में हराया था। शरद अवस्थी पिछले पांच साल से क्षेत्र में सक्रिय हैं। वहीं सवर्ण वोटर लगातार बीजेपी के लिए एकजुट हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वर्मा बिरादरी समेत गैरयादव तमाम ओबीसी बिरादरियों का मूड बीजेपी की तरफ ही है। ऐसे में इस सीट पर फरीद की राह आसान नहीं है। फरीद के लिए दूसरी चिंता का विषय ये है कि यहां से पूर्व एमएलसी हरगोविंद सिंह भी तैयारियों में लगे हुए हैं। बड़े-बड़े कार्यक्रम करके वो जिले में ना सिर्फ क्षत्रिय नेता के तौर पर पहचान बना रहे हैं बल्कि रामनगर सीट पर सपा उम्मीदवार के लिए मुश्किलें पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। शरद अवस्थी के साथ बीजेपी में कई दावेदार हैं, लेकिन वो सब सवर्ण जाति के ही हैं। क्योंकि सबको यहां के जातीय समीकरण और मौजूदा हालात का अंदाजा जरूर है, लेकिन शरद अवस्थी और हरगोविंद ऐसे नेता हैं, जिन्हें जमीन पर सियासत का अनुभव है। ऐसे में ये माना जा रहा है कि टिकट इन्हीं दोनों नेताओं के बीच ही होगा। ब्राहम्ण बाहुल्य सीट होने की वजह से शरद अवस्थी की दावेदारी बीजेपी में सबसे मजबूत है, लेकिन वो टिकट वितरण में जातीय संतुलन को बनाए रख पाने में कमजोर साबित हो रहे हैं, क्यूंकि जिले की दरियाबाद सीट से मंत्री सतीश शर्मा तो उम्मीदवार होंगे हीं। वहीं हरगोविंद सिंह इस मामले में शरद अवस्थी से आगे निकलते प्रतीत हो रहे हैं, क्यूंकि जिले में क्षत्रिय बिरादरी का प्रतिनिधित्व नहीं है। 

खैर टिकट किसी का भी हो मौजूदा हालात में रामनगर में विपक्षी दलों में रामनगर से मुस्लिम उम्मीदवार होना जीत की गारंटी नहीं हो सकता। फरीद महफूज जिले की सियासत का महामानव हैं। जिले की नब्ज उनसे बेहतर कौन समझ सकता है। यहीं वजह है कि उनको तमाम तरह के कयाब और अफवाह आम हैं। अब देखना ये है कि वो कौन सा पैतरा चलते हैं। लेकिन इन सब के बीच सवाल यही है कि फरीद इस बार कितने महफूज हैं?

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