ताज़ा खबरें

7/recent/ticker-posts

Barbanki: दरियाबाद में दरियादिली दिखाने को तैयार नहीं सपा का कोई भी दिग्गज

 

Barbanki News... जिले की चार समान्य विधानसभा सीटों पर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के दिग्गजों की दावेदारी के कयास इन दिनों जोरों पर हैं, लेकिन मंत्री सतीश शर्मा की सीट दरियाबाद में सपा का कोई दिग्गज ताल ठोकने को तैयार नहीं है। बल्कि पार्टी के अंदर इस सीट पर किसी को बलि का बकरा बनाने के लिए लॉबिंग जोरों पर है। इससे साफ पता चलता है कि सतीश शर्मा के गढ़ में उनके कद और सीएम योगी का मजबूत सिपाही होने के नाते सपा का कोई भी दिग्गज नेता उन्हें चुनौती देने की हिम्मत नही जुटा पा रहा है। 

 दरअसल जिले की दरियाबाद विधानसभा सीट पर सपा के मजबूत पीडीए फार्मूले के दावों के बावजूद यहां से सपा का कोई दिग्गज मैदान में उतरने को तैयार नहीं है। हालांकि यहां से उम्मीदवारों का दावा करने वालों की कमी नहीं है, लेकिन सपा का कोई भी दिग्गज इस सीट पर चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार नहीं दिख रही है। जिले की 5 में से 4 सीटों पर सपा के अंदर टिकटों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। एक कयास ये है कि पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप रामनगर से चुनावी मैदान में उतरना चाहते हैं। वहीं बेनी बाबू के नाम के सहारे दोबारा विधानसभा पहुंचने का ख्वाब देख रहे राकेश कुमार वर्मा के बारे में कयास है कि वो कुर्सी क्षेत्र से ही अपनी किस्मत आजमाएंगे। अब बचे सपा के तीसरे और जिले में एमवाई समीकरण का आधार रामनगर से विधायक फरीद महफूज किदवई। उनके बारे में कयासों की कोई कमी नहीं है। कोई उन्हें रिटायर बता रहा है, तो कोई उन्हें या उनके पुत्र को किसी दूसरी सीट भेजे जाने का दावा कर रहा है। इन सब के बावजूद उनके दरियाबाद से चुनाव लड़ने के आसार कम ही हैं। क्यूंकि दरियाबाद के जातीय समीकरण मुस्मिल उम्मीदवार का होना जीत की गारंटी नहीं है। सोशल मीडिया पर प्रसारित कयासों में एक कयास ये भी है कि जैदपुर सुरक्षित से सपा विधायक गौरव रावत को दरियाबाद से चुनाव लड़ाया जा सकता है। वहीं उनकी सीट गठबंधन के तहत कांग्रेस के खाते में जा सकती है। सपा के ही सूत्रों के मुताबिक ये भी दावा किया जा रहा है कि रामनगर से सपा विधायक फरीद महफूज किदवई ने रामनगर से सरेंडर करके कुर्सी को फिर से अपना ठिकाना बनाने को तय कर लिया है। कयास और अफवाह तमाम तरह की हैं, लेकिन इन सब में खास ये है कि जिले में सपा के तीन दिग्गजों में से किसी ने दरियाबाद से उम्मीदवारी की दावेदार पुरजोर तरीके से नहीं की है। बल्कि इसके इतर दरियाबाद से इसकी टोपी उसके सिर या किसी दूसरे बलि का बकरा बनाने की लॉबिंग जोरों पर है। 

 दरियाबद से उम्मीदवारी पीछे हटने के कई वजह हैं। पहली वजह यहां के जाति समीकरण हैं, जो पीडीए एकता के तमाम दावों के बावजूद बीजेपी के पक्ष में मजबूत हैं। दरियाबाद सीट पर कुर्सी, रामनगर और सदर के मुकाबले यहां मुस्लिम और यादव वोटों की तादाद इतनी नहीं है कि एमवाई समीकरण के आधार पर लाल और हरा झंडा गाड़ा जा सके। इस सीट पर वर्मा बिरादरी की तादाद बेहतर है,लेकिन बीजेपी ने वर्मा बिरादरी को अपने पाले में लाने के लिए सालों से जो रणनीति बनाई है, उससे वर्मा बिरादरी का वोट सपा उम्मीदवार को हासिल करने में लाले पड़ जाएंगे। इस सीट पर रावत बिरादरी भी असरदार है, लेकिन रावत बिरादरी को अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी ने पहले गाणाबंदी कर दी है। ऐसे में सपा इस सीट पर किन वोटों पर कितना टिक पाएगी। ये बात सभी को पता है। शायद यही वजह है कि सपा का कोई भी दिग्गज इस सीट पर उतरने को तैयार नहीं है।

जातीय समीकरण के साथ मौजूदा हालात और क्षेत्रीय स्तर पर मंत्री सतीश शर्मा की कार्यप्रणाली और लोकप्रियता भी इस सीट पर विपक्षी दलों के नेताओं के हौसले पस्त कर रहे हैं। हालांकि लोकसभा चुनावों में तमाम सीटों की तरह दरियाबाद में भी बीजेपी पीछे रही थी, लेकिन पिछले दो-ढाई सालों में हालात तेजी से बदले हैं। बीजेपी ने अपनी तमाम गल्तियों पर काम किया है और पीडीए के मुकाबले सम्पूर्ण जातियों को विभिन्न पदों पर प्रतिनिधित्व देकर बेहतरी संतुलन बनाने की कोशिश की है। अब देखना ये है कि इस सीट पर सपा कोई दिग्गज या अन्य कोई नेता इस सीट पर किस तरह बीजेपी को टक्कर देता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ