Barabanki News... प्रदेश कांग्रेस नेता और जिले की सदर विधानसभा सीट से दावेदार नईम सिद्दीकी की सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट ने जिला कांग्रेस में अंदरुनी कलह की पोल खोल दी है। पोस्ट की भाषा से स्पष्ट है कि जिले में कांग्रेस नेता एक दूसरे की टांग खीचने में कतई पीछे नहीं हैं और कोई भी मौका चूकना नहीं चाहते। दरअसल नईम सिद्दीकी ने रविवार की सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की। इस पोस्ट में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के उस फैसले का स्वागत और सराहना की, जिसमें ये कहा गया है कि कांग्रेस के जिलाध्यक्षों को विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा। इस सूचना के साथ एक लंबा-चौड़ा पोस्ट उन्होंने लिखा है। इस पोस्ट को लिखने के पीछे का मकसद कोई जानकारी देना नहीं है, बल्कि इसका मकसद ये बताना है कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष अब उम्मीदवारी ठोक नहीं सकते।
आपको बता दें कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष इन दिनों रामनगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनने के लिए कोशिश कर रहे हैं,लेकिन वो ये भी कहते हैं कि जो भी फैसला होगा वो हाईकमान तय और गठबंधन की स्थिति तय करेगी। वहीं नईम सिद्दीकी जिले की सदर सीट से उम्मीदवारी ठोक रहे हैं। दोनों की सीटें अलग-अलग हैं, लेकिन इसके बावजूद नईम सिद्दीकी लगातार इस तरह के बयान देते रहे हैं कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष को विधानसभा चुनाव लड़ाने की कोई परंपरा नहीं है। इसकी वजह ये है कि अगर कांग्रेस में सामान्य सीट पर चुनाव लड़ने की कोई हालत बनती है, तो उसमें मुस्लिम उम्मीदवार एक ही होगा। शायद यही वजह है कि नईम सिद्दीकी कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के उस फैसले का स्वागत और सराहना कर रहो हैं, जिसमें ये कहा गया है कि कांग्रेस के जिलाध्यक्षों को विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा।
नईम सिद्दीकी की मो मोहसिन से सियासी टकराव काफी पुराना है। वो मोहसिन को अपना बताते हैं, जिले में उनकी तरफ से पार्टी की जो होर्डिंग लगाई जाती हैं, उनमें वो मोहसिन की तस्वीर नहीं लगवाते। उनके साथ जल्दी मंच साझा नहीं करते और हमेशा सियासी आंकड़ा बनाए रहते हैं। इसकी वजह वही है, जो ऊपर बताई जा चुकी है। नईम सिद्दीकी सदर सीट पर किसी भी सूरत में चुनाव लड़ने की बात करते हैं। उनके बीएसपी में संबंध भी हैं और बीएसपी की एक बड़ी लॉबी उनके साथ भी लगी रहती है। उनका रुख भी बीएसपी के लिए सॉफ्ट है। उनका यहां तक मानना है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन नहीं होगा, इतना ही नहीं, वो बीएसपी के साथ गठबंधन के भी पक्षधर हैं। दूसरी तरफ मोहिसन की पहचान जिले में और पार्टी में एक सुलझे और समझदार नेता की है। जिले में कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने में उन्होंने जीजान से कोशिश की है। वो रामनगर से दावेदारी तो करते हैं, लेकिन एक दायरे के अंदर रहते हुए और पार्टी के तमाम प्रोटोकॉल को अपनाते हुए।
खैर ये पार्टी का अंदरुनी मामला है। कौन, कहां से दावेदारी करता है और किसको कहां से टिकट मिलता है। ये पार्टी के लोग तय करेंगे, लेकिन जिस भाषा और जिस शैली में नईम सिद्दीकी ने सोशल मीडिया पर रविवार को जो पोस्ट लिखा है, उससे स्पष्ट है कि टिकट के लिए कांग्रेस में अभी से मारामारी है, जबकि अभी ये ही तय नहीं है कि कैसे और कितनी सीटें कांग्रेस जिले में लड़ने वाली है।


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