Barabanki News... हिन्दुस्तान सैकड़ों साल गुलाम रहा। बाबर विदेशी था। वह हमलावर था। वह हिन्दुस्तान में आकर मंदिरों को तोड़कर कैसे चला गया। अगर हम जात-पात में नहीं बंटे होते तो क्या हिन्दुतान गुलाम हो सकता था। हिन्दुस्तान की गुलामी का कारण जातिवाद था। उक्त विचार मंगलवार को नगर के गांधी भवन में अपने 80वें जन्मदिवस और आपातकाल के 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित 'रघु ठाकुर: विचार और वैचारिकी के आठ दशक' विषयक संगोष्ठी में खुद ठाकुर ने व्यक्त किए। इस दौके पर गांधी भवन में समरसता सहभोज और भंडारा भी आयोजित किया गया।
प्रखर समाजवादी चिन्तक एवं लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के संयोजक रघु ठाकुर ने कहा कि जातिवाद को खत्म करो। यह बात डॉ लोहिया ने कही। लोहिया चाहते थे कि पिछड़ी जाति के लोग इकट्ठे हों, हिन्दुस्तान की सियासत में आएं। उनके आगे आने का लक्ष्य था हिन्दुस्तान की व्यवस्था को बदला जाए। कुर्सी की भूख को समाप्त करें और हिस्सेदारी लें। परन्तु व्यवस्था को मिटाएं। दुर्भाग्य की बात है कि आज पिछड़ी और दलित जातियों के लोग जो सत्ता में गए हैं वह चरित्र से, विचार से और दिमाग से ब्राहम्णवादी समाज की व्यवस्था बन गए है। आज वे लोग क्या व्यवस्था को बदलना चाहते है? यह बड़ा सवाल है। जाति और परिवारवाद के नाम पर वोट मांगते हैं क्या यही लोहिया का सपना और सोंच है? जिस दौर में हम लोग विचार को लेकर आए थे वह बदलाव का दौर था।
ठाकुर ने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि लोहिया नेहरू के खिलाफ थे। कुछ कांग्रेसी हैं जो लोहिया के नाम से चिढ़ते हैं। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि अटल बिहारी बाजपेई बहुत अच्छे आदमी थे। नेहरू जी कहते थे अटल बिहारी तुम एक दिन जरूर प्रधानमंत्री बनोगे। लेकिन किस दल के, उसी जनसंघ और आरएसएस के जिसने बाबरी मस्जिद को तोड़ा। बाबरी मस्जिट पर अटल जी का क्या भाषण था, मंदिर वहीं बनाएंगे। ऐसे अटल बिहारी बाजपेई कांग्रेस को स्वीकार्य हैं, लेकिन लोहिया स्वीकार्य नहीं हैं। कांग्रेस ने गांधी का नाम लेकर सत्ता पायी और काम नेहरू का किया। इसीलिए कांग्रेस पर गांधी के नाम की चर्चा तो थी विचारों का कोई असर नहीं था। श्री ठाकुर ने कहा कि बाराबंकी के साथ लम्बे समय का एक रिश्ता है। यहां डॉ लोहिया के साथ राजनाथ शर्मा ने बहुत काम किया है। इसी बाराबंकी के शमशी मिनाई साहब थे। जिनके दो नारों को डा लोहिया ने संसद में बोलकर अमर कर दिया था। ‘सब कुछ है अपने देश में रोटी नहीं, तो क्या वायदे लपेट लो, लंगोटी नही तो क्या’। इन दो बातों से डॉ लोहिया ने संसद में उस गरीब का चित्र रेखांकित किया जो हिन्दुस्तान का प्रतीक है।
कार्यक्रम संयोजक राजनाथ शर्मा ने कहा कि रघु ठाकुर साठ के दशक से समाजवादी आंदोलन से जुड़े। उन्होंने अपने जीवन के लगभग आठ बरस जेल में बिताए। उन्हें सबसे बड़ी और लंबी सजा आपातकाल में मिली। मीसा बंदी में 19 माह जेल में रहे। इस दौरान उन्हें करीब दो माह से अधिक समय तक सागर जेल में बिना कपड़ों के (नग्न अवस्था में) रखा गया।
सपा प्रवक्ता फाराज किदवाई ने कहा कि लोहिया की सप्तक्रान्तियां ही समाजवाद का दर्शन है। आज जब हम रघु ठाकुर के जीवन के आठ दशकों के सफर को देखते हैं, तो लगता है कि असली नेता वही होता है जो जनता से निकला हो, जनता के बीच रहा हो और जनता के लिए जिया हो। रघु ठाकुर की कहानी सिर्फ इतिहास नहीं, एक प्रेरणा है।
वरिष्ठ पत्रकार आनंद वर्द्धन सिंह ने कहा कि आज राजनीति में हमला नेहरू पर नहीं बल्कि गांधी पर हो रहा है। नेहरू सिर्फ एक जरिया मात्र हैं। सभा की अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक सरवर अली खान ने कहा कि सादगी और जमीन से जुड़ाव ही रघु ठाकुर की सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. लोहिया का प्रभाव उन पर इतना जबरदस्त था कि जीवन भर आन्दोलनों से जुड़े रहे।
सभा का संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया। इस मौके पर पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविन्द कुमार सिंह गोप, पूर्व एमएलसी राजेश यादव राजू, वरिष्ठ सपा नेता ज्ञान सिंह यादव, सभासद ताज बाबार राईन, मो फैसल और शिवा शर्मा ने रघु ठाकुर को शॉल ओढ़ाकर और प्रतीक चिन्ह देका उनका नागरिक अभिनंदन किया। सभा में मुख्य रूप से रामसेवक यादव, मुकेश चन्द्रा, राना प्रताप सिंह, बृजेश दीक्षित, सलाउद्दीन किदवाई, हुमायूं नईम खान, शऊर कामिल किदवाई, मनोज शर्मा, राधेश्याम यादव, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, अशोक शुक्ला, विनोद भारती, साकेत संत मौर्य आदिकई लोग मौजूद रहे।
Raghu Thakur showed a mirror to pseudo-socialists, said – asking for votes in the name of caste and familyism, was this Lohia's dream?

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