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Bahraich: हाईकोर्ट के फैसले के बाद सय्यद सालार मसूद गाजी के अकीदतमंदों में खुशी की लहर

 

Bahraich News... बहराइच में हजरत सय्यद सालार मसूद गाजी र०अ० दरगाह पर जेठ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की प्रार्थना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि रगाह शरीफ में अनुष्ठानिक प्रथाओं को पूरा करने के लिए नियमित गतिविधियाँ खुली रहेंगी, जिसके लिए कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी सहायता और आवश्यक नागरिक सुविधाएँ राज्य द्वारा राज्य के सहयोग से प्रदान की जाएंगी। इस फैसले से बहराइच समेत पूरे देश में हजरत सय्यद सालार मसूद गाजी र०अ० में आस्था रखने वालों में खुशी की लहर है।


   

मीडिया रिपोर्टंस के मुताबिक इस साल प्रशासन ने बहराइच में हजरत सय्यद सालार मसूद गाजी र०अ० दरगाह पर जेठ मेला लगाने की इजाजत नहीं दी थी। ये भी सुनने में आया था कि दरगाह पर जायरीनों और प्रबंध कमेटी को अनुष्ठानिक प्रथाओं को पूरा करने से भी रोका गया था। इन सब के विरोध में दरगाह प्रबंधन कमेटी ने अध्यक्ष बकाउल्लाह के नेतृत्व में हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जेठ मेले के आयोजन पर फैसला सुरक्षित रखते हुए फैसला सुनाए जाने तक, अंतरिम उपाय के रूप में दरगाह शरीफ में अनुष्ठानिक प्रथाओं को पूरा करने का आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पषट किया है इसके लिए कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी सहायता और आवश्यक नागरिक सुविधाएँ राज्य द्वारा राज्य के सहयोग से प्रदान की जाएंगी। 

 इस मामले पर सरकार के ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई। वहीं हाईकोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया है कि सांस्कृतिक/व्यावसायिक सजावट के साथ 'जेठ मेले' पर वो प्रथम दृष्टया राज्य अधिकारियों के निर्णय में हस्तक्षेप करने के लिए राजी नहीं हैं। 

 कोर्ट ने ये भी आदेश दिया हैं कि समिति यह सुनिश्चित करेगी कि श्रद्धालु नियमित रूप से मध्यम संख्या में दरगाह पर आएं ताकि किसी भी भगदड़ या अवांछित स्थिति की संभावना से बचा जा सके जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता हो और प्रशासन के लिए मुश्किलें पैदा हों।

 हाईकोर्ट के इस फैसले हजरत सय्यद सालार मसूद गाजी में आस्था रखने वालों में खुशी की लहर है। देश के कोने से जायरीन हाईकोर्ट के इस फैसले पर खुशी का इजहार कर रहे हैं। हर कोई इस मामले पर प्रबंध कमेटी के चेयरमैन बकाउल्ला की रणनीति और उनके प्रयासों की तारफी कर रहे हैं। वहीं इस मामले पर उनकी आलोचकों को कोर्ट के आदेश से गहरा धक्का भी लगा है।


After the High Court's decision, there was a wave of happiness among the academics of Syed Salar Masood Ghazi.


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