Barabanki News... आज के दौर में सोशल मीडिया जहां हर वर्ग की जरूरत बनकर उभरा है, वहीं इसके दुष्प्रभाव भी कम नहीं हैं। इसकी जितनी जरूत है उससे कहीं ज्यादा ये इंसानों की जिंदगी पर बुरे प्रभाव डाल रहा है। अब इस चीज की चिंताएं भी शुरू हो गई हैं। लोग इसके निदान भी तलाश रहे हैं। इसी क्रम में जिले के नवाबगंज तहसील के तिंदोला में स्थित श्री राम स्वरुप यूनिवर्सिटी ने सराहनीय पहल की है। यूनिवर्सिटी ने अपनी फ्रेशर पार्टी में छात्रों को इस गंभीर समस्या पर जागरूक कर रही है।


   

तिंदोला स्थित श्री राम स्वरूप यूनिवर्सिटी में इन दिनों फ्रेशर पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी में इस पार्टी की थीम 'नो फिल्टर नीडेड, असली मैडनेस सीडेड' तय की गई है। यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार प्रोफेसर नीरजा जिंदल ने शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बताया कि फ्रेशर पार्टी इस टैग लाइन के साथ इसलिए मनाई जा रही है क्योंकि सोशल मीडिया के दौर में बच्चे फिल्टर लाइफ जी रहे हैं। उन्होंने उदाहरण के साथ बताया कि आजकल ये कहा जा रहा है कि बच्चों में इम्युनिटी नहीं है। इम्युनिटी कहां से होगी? क्यूंकि वो मिट्टी में, तो खेला नहीं है। धूप में कोई निकल नहीं रहा है। सब लोग घर पर बैठकर सोशल मीडिया पर रील वगैरह देख रहे हैं। इसके कई दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं। इसलिए उपकोक्च टैगलाइन के जरिए बच्चों को जागरूक करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि फ्रेशर पार्टी 3 हजार नए छात्रों और सेकेंडियर के छात्रों के बीच हो रही है। इसका मकसद यही है की नए छात्रों को कॉलेज के माहौल और यहां के लोगों के व्यवहार से अवगत कराया जा सके।

   

श्री राम स्वरूप यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो बीएम दीक्षित ने बताया कि यूनिवर्सिटी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वचनबद्ध है। इसके लिए गुणवत्तायुक्त शिक्षण के साथ कई तरह के प्रबंध कॉलेज में किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे दोनों ब्रांचों को मिलाकर इस वक्त करीब 18000 छात्र पंजीकृत हैं। इस वर्ष करीब 3000 छात्रों ने प्रवेश ने लिया है। उन्होंने बताया कि छात्रों से बेहतर संवाद के लिए हमारे प्रत्येक पाठ्यक्रम के प्रत्येक कक्षा में एक सीनेट है, जिसका चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छात्रों के बीच वोटिंग से कराया गया है। इन सीनेट के चार ऑफिस बियरर हैं। उन्होंने बताया एऩईपी की गायडलाइन के तहत हमारे यहां हर कक्षा में सारछी का चयन किया गया है। जो छात्रों को नई शिक्षा नीति के बारे में जागरुक करते हैं।