Barabanki News... प्रखर समाजवादी नेता व नेताजी सुभाषचंद्र बोस के करीब रहे आजाद हिन्द फौज के सेनानी कैप्टन अब्बास अली और सम्पूर्ण क्रान्ति के नायक जयप्रकाश नारायण की स्मृति में शनिवार को नगर के गांधी भवन में एक सभा आयोजित हुई। इस मौके पर तमाम वक्ताओं ने दोनों महापुरुषों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
स्मृति सभा के मुख्य अतिथि पूर्व एमएलसी राजेश यादव राजू ने कहा कि कैप्टन अब्बास अली और जयप्रकाश नारायण ने समाजवादी विचारधारा को भी मजबूत करने के लिये बड़ी कुर्बानियां दीं। वह दोनों देश के अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी थे। अब्बास अली ने आजाद हिंद फौज के माध्यम से देश को आजाद करने के लिए जो संघर्ष किया, और जयप्रकाश नारायण ने 1942 के आंदोलन में समाजवादी विचारधारा को मजबूत किया और देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सभा की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने कहा कि कैप्टन अब्बास अली बीबीसी के पूर्व संवाददाता एवं वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली के पिता तथा समाजवादी आंदोलन के क्रांतिकारी नेता थे। एएमयू के छात्र रह चुके अब्बास अली वर्ष 1939 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भर्ती हुए थे। जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंका, तो वह अंग्रेजी सेना की नौकरी छोड़कर आईएनए में शामिल हो गए। उन्होंने राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेन्द्र देव और जय प्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं से प्रभावित होकर राजनीति में पर्दापण किया। वह आपातकाल में जेल गए और बाद में वह राज्य विधान परिषद के सदस्य और जनता पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष भी बने।
श्री शर्मा ने कहा कि जय प्रकाश नारायण ने आजादी के बाद लोकतंत्र पर पैदा हुए खतरा से देश को मुक्त कराया। वो युवा शक्ति के बल पर बदलाव की ताकत पहचानते थे। उम्र अधिक होने के बाद भी अंतिम समय तक वह मन से युवा रहे। वरिष्ठ सपा नेता कुवंर ज्ञान सिंह यादव ने कहा कि जेपी और अब्बास अली सच्चे समाजवादी थे। उन्होंने हमेशा दबे कुचले और मजदूरों की लड़ाई लड़ी। सभा का संचालन हुमायूं नईम खान ने किया। इस मौके पर मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, प्रधान रमेश चन्द्र वर्मा, विजय रावत, सत्यवान वर्मा, पंकज कुमार एडवोकेट, मंशाराम रावत, सोनू चौबे, तुलसीराम यादव, राजकुमार बीडीसी, अनिल यादव, रमेश वर्मा, रंजीत कुमार, विवेक सिंह, अभिषेक, रणंजय शर्मा आदि कई लोग मौजूद रहे।

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