Barabanki News... प्रदेश सरकार ने फसलों के अवशेष जलाए जाने से उत्पन्न प्रदूषण की रोकथाम हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं और पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई एवं पर्यावरणीय प्रतिकर की दरों को दोगुना कर दिया गया है।
मुख्य सचिव की तरफ से 13 नवंबर 2017 के जारी शासनादेश संख्या 1618/1-9-2017-रा0-9 के अंतर्गत राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम की धारा 24 के तहत क्षतिपूर्ति की वसूली एवं धारा 26 के अंतर्गत पर्यावरणीय प्रतिकर निर्धारण के प्रावधान किए गए थे। इसके तहत 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए ₹2500 प्रति घटना, 02 से 05 एकड़ क्षेत्र के लिए ₹5000 प्रति घटना और 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए ₹15000 प्रति घटना निर्धारित की गई थी।
बाद में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना 6 नवम्बर 2024 द्वारा इन दरों में वृद्धि की गई है। नई दरें पहले से दोगुनी कर दी गई हैं। इनमें 02 एकड़ से कम क्षेत्र हेतु ₹5000 प्रति घटना, 02 से 05 एकड़ क्षेत्र हेतु ₹10000 प्रति घटना और 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र हेतु ₹30000 प्रति घटना तय की गई है। साथ ही, उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही किए जाने का भी प्रावधान किया गया है।
प्रशासन ने किसान भाइयों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं। पराली को सड़ाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग करें। पराली जलाने से भूमि की उर्वरता शक्ति घटती है, उपयोगी कीट नष्ट हो जाते हैं और पर्यावरण प्रदूषित होता है। पराली जलाने की स्थिति में निर्धारित दरों के अनुसार पर्यावरणीय प्रतिकर (जुर्माना) लगाया जाएगा।
Don't burn stubble, the fine has been doubled.

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