Barabanki News... सामाजिक संस्था "मानवाधिकार एक्शन फोरम" व भारतीय किसान-मजदूर यूनियन (दशहरी) ने देवा स्थित "हाजी वारिस अली शाह मसोलियम ट्रस्ट" के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह से मुलाकात कर जायरीनों की सुविधा से सम्बन्धित बाराह सूत्रीय सुझाव पत्र सौंपा है। दोनों संगठनों ने निम्म लिखित सुझाव दिए हैं।
1. पहलगाम (J&K) में आतंकी घटना के मद्देनज़र विश्व प्रसिद्ध कौमी एकता धार्मिक तीर्थ स्थल दरगाह देवा शरीफ की कड़ी सुरक्षा बढ़ाई जाये तथा दरगाह के मुख्य प्रवेश गेट पर स्कैनर मशीन लगाई जाये तथा हर आने वाले मेहमानों का झोला, बैग व सामान ज़िम्मेदारी से चेक किया जाये। अक्सर कुछ लोग सामान सहित दर्शन हेतु दरगाह के बिल्कुल अन्दर तक चले जाते हैं जो कि सुरक्षा व्यवस्था के प्रति एक बड़ी लापरवाही है।
2. दरगाह परिसर के अन्दर बीड़ी-सिगरेट, पान-मसाला, तम्बाकू हुक्का चिलम आदि धुम्रपान से सम्बन्धित सेवन व सामग्री पर तत्काल प्रतिबन्ध लगाया जाये। एक पवित्र रूहानी आस्था के केन्द्र पर ऐसा करना उचित नहीं है। ऐसा करना इस धार्मिक स्थल के अनुशासन, आदर व सम्मान के विपरीत है।
3. अक्सर यह भी देखा जाता है कि आने वाले मेहमानों को रूकने के लिए कमरे की व्यवस्था को लेकर कोई पारदर्शिता नहीं है। जिससे ज़्यादा तर मेहमानों को कभी कमरा मिलता है और कभी नहीं मिलता है और ज़्यादा तर सभी कमरे भरे रहने की जानकारी दी जाती है। अतः एक डिजिटल स्क्रीन या हैन्ड ब्लैक बोर्ड के द्वारा प्रति दिन जरूरी मालू-मात के साथ यह जानकारी अपडेट की जाये कि कितने कमरे खाली और कितने भरे हैं। जिससे कमरों की व्यवस्था में पारदर्शिता आ सके और सभी को आसानी से कमरा मिल सके और सभी को सही जानकारी मिल सके।
4. दरगाह परिसर के अन्दर सभी कमरों के बाहर, बरामदों में व मैदान में यदि किसी कारण वश आग लग जाये तो उस पर तत्काल नियन्त्रण के लिए जगह-जगह फायर सिलेन्डर लगाया जाये व दरगाह परिसर के अन्दर झाडू-पोछा सहित साफ-सफाई की भी सर्वोत्तम व्यवस्था की जाये।
5. दरगाह परिसर के अन्दर कर्मचारियों में एक ही परिवार के कई सदस्य कार्यरत हैं जिससे और समूह के लोगों को रोजगार का अवसर नहीं मिल पाता है अतः इस पर संज्ञान लेकर हर बड़े वर्ग/बिरादरी/खानदान के लोगों में से एक या दो गरीब बेसहारा लोगों को भी यहां सेवा के लिए नौकरी दी जाये जिससे सभी की जीविका के लिए यहां सभी को एक समान अवसर मिल सके।
6. विश्व प्रसिद्ध सूफी सन्त हजरत हाजी सय्यद वारिस अली शाह रह० की सूफी व सामाजिक शिक्षाओं से प्रेरित होकर यहां पर उनके नाम से एक आधुनिक स्कूल-कॉलेज, मदरसे, मेडिकल कॉलेज की भी व्यवस्था की जाये ताकि उनके नाम से शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में खूब प्रचार-प्रसार व बढ़ावा मिल सके।
7. स्वास्थ्य सेवाओं / व्यवस्था के तहत दरगाह परिसर में कम से कम 2 एम्बुलेंस, 1 मेडिकल फार्मेसी, 1 ए०टी०एम० मशीन सहित जल-पान के लिए 1 कैन्टीन की व्यवस्था भी की जाये जिससे रात में मुख्य गेट बन्द हो जाने के बाद अन्दर रूकने वाले मेहमानों को किसी भी प्रकार की कोई भी समस्या न हो सके।
8. विश्व ख्याति प्राप्त सूफी शायर व सरकार वारिस पाक रह० के "सानी-ए-खुसरो" जनाब हज़रत बेदम शाह वारसी रह० के नाम से एक उर्दू लाइब्रेरी व प्रसिद्ध सूफी कवि जनाब हजरत औघट शाह वारसी रह० के नाम से एक हिन्दी लाइब्रेरी की स्थापना करवाई जाये जिससे आने वाले सभी लोगों को वारसी सिलसिले की सही से पूरी जानकारी हो सके।
9. दरगाह परिसर के अंदर एक टॉल-फ्री हेल्प लाइन नम्बर जारी किया जाये जिससे कि यहां पर आने वाले लोगों को दरगाह शरीफ, उनके कमरों व वहां रूके हुये जायरीनों / परिजनों सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हो सकें।
10. आज सोशल मीडिया के आधुनिक दौर में हाजी वारिस अली शाह मसोलियम ट्रस्ट की अपनी कोई भी आधिकारिक वेबसाइट व ई-मेल आई०डी० नहीं है और न ही इस ट्रस्ट का अपना कोई भी फेसबुक, व्हाटसऐप, इंस्टाग्राम सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑफिशियल अकाउन्ट नहीं है जिससे यहां पर आयोजित होने वाले वार्षिक मेलों, हर माह होने वाले कुल शरीफ व चाँद की खबरों सहित अन्य धार्मिक आयोजनों की जानकारियाँ हर व्यक्ति तक आसानी से नहीं हो पाती है अतः इसकी व्यवस्था करवाकर यहां होने वाले सभी कार्यक्रमों विशेष रूप से उर्स के दिनों में कव्वाली, नात शरीफ का लाइव टेलीकास्ट भी करवाया जाये जिससे कि जिन देशों से व दूर-दराज से यहां आस्था रखने वाले लोग यदि किसी भी कारण वश नही आ पाते हैं तो वो सभी लोग इस सुविधा से अपनी रूहानी / अत्मीय रूप से शिरकत कर सकेगें।
11. दरगाह परिसर के अंदर स्थित सरकार वारिस पाक की इबादत गाह मस्जिद-उल-वारिस की तरफ से कस्बे में होने वाली मय्यतों के लिए दो-चार डेड बॉडी फ्रीजरों सहित जरूरत पड़ने पर हर धर्म के लोगों के लिए उनकी आस्था के अनुसार अन्तिम संस्कार/कफन-दफन का भी पूरा इन्जाम करवाया जाये। यदि सम्भाव हो सके तो गरीब यतीम बेवा लड़कियों के लिए एक वार्षिक सामूहिक निकाह / विवाह की भी व्यवस्था करवा दी जाये तो यह जनहित में बहुत ही कल्याण कदम होगा।
12. दरगार के अन्दर कार्यरत सभी वरिष्ठ व कनिष्ठ कर्मचारियों का मासिक वेतन का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में (DBT) के माध्यम से किया जाये जिससे की वे सभी सरकार की पात्र योजनाओं का लाभ लेने के लिए, स्कूल कॉलजों में अपने बच्चों की शिक्षा व छात्रवृत्ति के लिए लेखपाल कानून-गो को अपनी सही वार्षिक आय बता सकें तथा जरूरत पड़ने पर बैंक द्वारा अपने सैलरी लोन की सुविधा प्राप्त कर सकें।
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