Lucknow News... भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPM) के राज्य सचिव मंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बहराइच स्थित गाजी की मजार की ऐतिहासिकता को दलितों के वोट बैंक में सेंधमारी की गरज से तोड़ मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है।
सचिव मण्डल ने प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर की पुस्तक ‘‘सोमनाथ, इतिहास एक, स्वर अनेक’’ के छठवें अध्याय के पृष्ठ सं0 131 से 134 में वर्णित तथ्यों के आधार पर मसूद को गोपालकों के साथ गाय की रक्षा करते समय शहीद होना बताया गया है। उसे गोरक्षक कहा गया है।
रोमिला थापर ने अपनी पुस्तक में यह भी लिखा है कि महमूद गजनवी के जुड़वा बेटों में से बड़े का नाम भी सालार मसूद था जो उनके साथ युद्धरत रहा। जिस गाजी की मजार बहराइच में है, वह चिश्ती परंपरा का सूफी संत थे, जो अपने मत का प्रचार करते हुए बहराइच आया था। कहा जाता है कि वह जब तक वहां रहा बहराइच में चितौरा झील के पास स्थित सूर्य मंदिर, जो उसे बहुत प्रिय था, को प्रायः देखने आया करता था। जिस दिन की घटना है उस दिन भी वह वहां पर था। सुहेलदेव के लोगों ने गोपालकों की गायें लूटने का प्रयास किया। शोर सुनकर मसूद गाजी गोपालकों के साथ गायों की रक्षा करते हुए शहीद हुआ। बाद में बहराइच में अहीरों समुदाय ने वहां पर उसकी समाधि बनवाई। कहा जाता है कि हत्या के समय उसकी शादी के कुछ दिन शेष थे।
रोमिला थापर यह भी कहती हैं कि इस मजार को गैर इस्लामिक परंपरा का कहते हुए अपने शासनकाल में सिकंदर लोदी ने भी बंद करने का आदेश दिया था। लोदी के अधूरे सपने को पूरा करने का काम आज योगी आदित्यनाथ की सरकार कर रही है तथा राजा सुहेलदेव के बहाने दलितों के वोट बैंक में सेंधमारी का सपना देख रही है।
भारत की सभी मजारें सूफी परंपरा की हैं। सूफी परंपरा हिन्दू मुस्लिम एकता की हिमायती थी। यही कारण है कि इन मजारों पर मुस्लिमों से अधिक हिन्दुओं की संख्या चादर चढ़ाने जाती है। भाजपा और उसके लोग देश को बर्बाद करने की दिशा में बढ़ते हुए बहराइच की इस मजार का भी इस्तेमाल अपनी राजनैतिक रोटी सेंकने के लिए कर रहे हैं। इसके अलावा इसमें और कोई ऐतिहासिकता नहीं है।
CPM claims that cow vigilantes were Sai. Salar Masood Ghazi, Yogi government under siege

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