Barabanki News... गांधीवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी को असंवैधानिक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि प्रो. अली खान को सिर्फ इसलिए तंग करना कि वह उनके ख्याल के नहीं हैॆ, बहुत बड़ा गुनाह है। प्रोफेसर अली ख़ान महमूदाबाद के साथ हम अडिग खड़े हैं। उनका लेखन समाज को विभाजित करने का नहीं, बल्कि गंभीर चिंतन और सामाजिक भागीदारी का प्रतीक है। 

 मंगलवार को श्री शर्मा ने एक वक्तव्य में बताया कि अली खान महमूदाबाद अशोक विश्वविद्यालय, सोनीपत (हरियाणा) में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख हैं। उनके पिता राजा साहब महमूदाबाद आमिर मोहम्मद खान सुलेमान मियाँ से मेरे गहरे रिश्ते रहे है। वह बहुत योग्य और सामाजिक व्यक्ति थे। उन्होंने ग़रीबों के लिए महलों के दरवाज़े खोल दिये। वह हमेशा ज़रूरतमंद के लिए खड़े रहे। वह इंसानियत की मिसाल बने, वहीं उनके बेटे अली खान महमूदाबाद भी बहुत ही संजीदा, सादगी पसंद और काबिल इंसान है। 

वे औपनिवेशिक भारत में मुस्लिम राजनीतिक विचारों के विशेषज्ञ हैं, जिस पर उन्होंने एक किताब भी लिखी है। वे बहुभाषी हैं। उनको हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी अच्छी आती है। श्री शर्मा ने बताया प्रो. अली खान ने मॉब लिंचिंग और निरंकुश बुलडोजर संस्कृति के खिलाफ आवाज़ उठाई थी। जिस पर असहमति जताते हुए हरियाणा सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया है। श्री शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक और राजनैतिक लोगों का सम्मान बहुत गिर गया है। सरकार को देश में एकता और सद्भाव का माहौल बनाना चाहिए। उन्हें देखना चाहिए कि अली महमूदाबाद के पुरखों ने देश में कई शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और अन्य जनउपयोगी कार्यों के लिए जमीनें दान की है। यही नहीं उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के हबीबुल्ला, बटलर और महमूदाबाद हॉस्टल बनवाया। जिनकी देश भक्ति पर संदेह नहीं किया जा सकता है।

Prof. Ali Khan Mahmudabad's writings are epitome of serious thinking and social participation.