Barabanki News... जिले के सिरौलीगौसपुर तहसील के मैलारायगंज गांव की ईदगाह मैदान में शुक्रवार रात स्वातंत्रता संग्राम सेनानी और देश के पहले संचार मंत्री स्व रफी अहमद किदवाई की याद में ऑल इंडिया मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुशायरा और कवि सम्मेलन में देश के तमाम मारुफ शोअरा-ए-कराम ने अपने कलाम से लोगों का दिल जीत लिया।
आपको बता दें कि मेलायरागंज की ईदगाह के मैदान में स्थित जंगली शहीह बाबा की मजार पर सलाना उर्स के दौरान पिछले 20 सालों से कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन होता आ रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को भी ये कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुशायरा और कवि सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि तनुज पुनिया ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मंत्री और रामनगर से सपा विधायक फरीद महफूज किदवाई ने की। 

मुशायरे से पहले मुख्य अतिथि तनुज पुनिया ने स्वर्गीय रफी अहमद किदवाई के देश में योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश को खाद्य संकट से निकालने में भी स्वर्गीय रफी अहमद किदवाई ने अहम किरदार अदा किया था। तनुज ने संकल्प लिया कि वो आगे उनके बताए रास्ते पर चलते रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रामनगर से सपा विधायक और स्वर्गीय रफी अहमद किदवाई ने उनके चचा की याद में मुशायरा और कवि सम्मेलन कराने के लिए आयोजकों की सराहना की। उन्होंने भी देश में रफी अहमद किदवाई के योगदान किया। कार्यक्रम में सभी अतिथियों को मोमेंटो और बुके देकर सम्मानित भी किया गया। मुशायारा और कवि सम्मेलन में पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप और कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहम्मद मोहसिन को भी सम्मानित किया गया।
इसके बाद मशूहर शायर सैयद अब्बास रजा नैय्यर की निजामत में मुशायरा और कवि सम्मेलन का आगाज किया गया। मुशायरे में सबसे पहले शादाब आजामी ने नाते पाक पढ़ी गई। इसके बाद एक-एक करके शोअरा कराम ने अपने कलाम से लोगों का दिल जीत लिया।
मुशायरा और कवि सम्मेलन में शायरों के द्वारा पेश किए गए प्रमुख शेर 

उबेद आजमी 
 ताबे नजारा से हैं बेगाना 
दिल करे ख्वाहिश कलीमाना 

रफ्ता-रफ्ता करे ये दीवाना 
जलवा-ए-हुस्न-ए-बेहिजाबाना 

डॉ शशि श्रेया 
हम यहां सूरज हथेली पर लिए बैठे रहे 
आपसे जुगनू के हांथों में सवेरा दे दिया 
 जा रहे हो चांद से महबूब के आगोश में 
 होश रखना, ये ना हो कि नाम मेरा ले लिया 

 खर्शीद हया 
मेरी जानिब मोहब्बत से न देखो 
मोहब्बत पर जवाल आया है। 

 मुशायरे में उस्मान मीनाई, हाशिम फिरोजाबादी,शायर नर कंकाल जेसे शायरों ने भी अपना कलाम पेश किया।

Mushaira and Kavi Sammelan in memory of late Rafi Ahmed Kidwai