ताज़ा खबरें

7/recent/ticker-posts

Barabanki: वर्कशॉप में अग्निकांड, बाढ़, सहित तमाम आपदाओं से बचाव के तरीके

 

Barabanki News... दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति की एक दिवसीय कार्यशाला डॉ, केएनएस मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (मेयो मेडिकल कॉलेज) के सभागार में आयोजित हुई। कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए यूपी विधानपरिषद की दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति के सभापति व सदस्यों को बुके देकर उनका स्वागत किया। जिसके बाद कार्यशाला की कार्यवाही शुरू हुई। 

 इस दौरान सभापति व जनपद प्रभारी एमएलसी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा दैवीय आपदाओं के विषय में स्पष्ट तौर पर बिंदुवार रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में अभी तक जनता योजनाओं का लाभ नहीं ले पाता था। इसलिये इस तरह की कार्यशाला के आयोजन की जरूरत पड़ी। गांव स्तर तक लोग जागरूक हो, जिससे अग्निकांड, बाढ़, सहित विभिन्न आपदाओं से बचाव किया जा सके और आपदाओं के आने के बाद त्वरित गति से रेस्क्यू करके जन व धन हानि को नुकसान होने से रोका जा सके। इसके लिये ही प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा पीड़ितों के लिए योजनाएं बनाई है। जिसके अंतर्गत यदि किसी का घर अग्निकांड में जल जाता है। तो उसका नाम मुख्यमंत्री आवास सूची में प्राथमिकता से भेजा जाएगा। वहीं दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति के सदस्य व एमएलसी अंगद कुमार सिंह ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि आपदाएं बताकर नहीं आती हैं, लेकिन जागरूकता से इसकी रोकथाम की जा सकती है। दैवीय आपदा से मृत्यु होने पर परिवार के आश्रितों को चार लाख रुपये की सहायता सरकार द्वारा की जाती है। दैवीय आपदा से बचाव के लिये गांव-गांव कोटेदार और प्रधान के माध्यम से जागरूकता लाने की जरूरत है। इसके लिए डिस्प्ले आदि के माध्यम से जन-जागरूकता की जाए। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक प्रत्येक स्कूलों में एक-एक शिक्षक को इस सम्बंध में प्रशिक्षण दिलाये जिससे शिक्षक ग्रामीणों और बच्चों को जागरूक कर सकें। 

 इनके अतरिक्त विधानपरिषद सदस्य व दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति के सदस्य एमएलसी उमेश द्विवेदी ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जानकारी के अभाव में लोग योजना के लाभ से वंचित हो जाते हैं। उन्होंने ने कहा कि बाराबंकी में बाढ़ एक बड़ी समस्या है, नदी के बहाव से खेतों की फसल तो नष्ट होती ही है और बाढ़ के पानी से खेतों में रेत(गार्द) जमा हो जाती है। जिसकी निकासी हेतु सरकार द्वारा प्रति हेक्टेयर धनराशि भी दी जाती है परंतु जानकारी के अभाव में लोग लाभ नहीं ले पाते हैं। वहीं कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार सिंह ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों को आपदाओं की जानकारी और बचाव के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 11-11 घटनाओं को आपदा की सूची में शामिल किया गया है। जिनमें भारी वर्षा, अतिवृष्टि, आंधी, तूफान, सर्पदंश, सीवर सफाई, गैस रिसाव, बोरवेल में गिरना, पानी में डूबकर मौत आदि शामिल है। साथ ही उन्होंने बताया कि डूबने से होने वाली मौतों में प्रदेश के टॉप पांच जनपदों में बाराबंकी शामिल है। यह हमारे सामने एक चुनौती है कि हम इससे किस तरह से निपटेंगे। वहीं अंकुर माथुर ने सर्पदंश से बचाव के तरीकों के विषय में जानकारी दी। कार्यशाला में जनप्रतिनिधियों सहित जिले स्तर के अधिकारीगण व डॉ केएनएस मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (मेयो मेडिकल) के चेयरपर्सन डॉ. मधुलिका सिंह, वाईस चेयरमैन डॉ. राहुल सिंह, कुलपति प्रो. शैली अवस्थी, उप कुलपति प्रो. सुधीर कुमार, डीन प्रो. एन. के. मोहिन्द्रू, कुलसचिव रंजीत कुमार सिंह व प्रशासी अधिकारी रणधीर सिंह शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता आशीष पाठक ने किया।

 सभापति ने अधिकारियों के साथ की बैठक दिए निर्देश
 कलेक्ट्रेट परिसर स्थित लोकसभागार में उत्तर प्रदेश विधानपरिषद की दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति की समीक्षा बैठक समिति के सभापति/जिला प्रभारी, इंजी0 री अवनीश कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमें समिति के सदस्यगण एमएलसी उमेश द्विवेदी, एमएलसी अंगद कुमार सिंह और एमएलसी मोहम्मद जासमीर अंसारी, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह सहित समीक्षा अधिकारी विवेक सिंह, अपर निजी सचिव अभिनव यादव, प्रतिवेदक सुधीर यादव व अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरुण कुमार सिंह, डीएफओ, सीएमओ, बीएसए, डीआईओएस, डीएसओ, समाज कल्याण विभाग सहित नगर पालिका व नगर पंचायतों सहित समस्त जिले स्तर के अधिकारीगण उपस्थित रहे। 

 बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) अरुण कुमार सिंह ने आपदा प्रबंधन के सम्बंध में विभिन्न विभागों द्वारा जनपद स्तर पर किये गए कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की। बैठक में सभापति व सदस्यगणों द्वारा विभागवार क्रमशः समीक्षा की। सर्वप्रथम बाढ़ से प्रभावित इलाकों में किये गए कार्यों की जानकारी ली। सर्पदंश व कुएं और तालाब में डूबने से होने वाली जनहानि के सम्बंध में जानकारी ली और प्रभावित परिवारों को सहायता दिलाने हेतु आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। इसके बाद एमएलसी अंगद कुमार सिंह ने कहा कि शीतलहर में कम्बल वितरण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को भी बुलाया जाए। आश्रय स्थलों के विषय में जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। सभापति इंजी0 अवनीश कुमार सिंह ने सिचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि बारिश में जल निकासी की एक बड़ी है इसके लिये जरूरी उपाय किये जायें समय से सभी ड्रेनों और नालों की साफ-सफाई समय रहते करवा ली जाए। जिससे लोगों को समस्याओं का सामना न करना पड़े। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जाए। लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में सड़कों की मरम्मत समय पर कराई जाए। वहीं वन विभाग के अधिकारियों को पौधरोपण व पौधों को बचाने हेतु ठोस कार्ययोजना बनाने और उसके क्रियान्वयन के निर्देश दिए। बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी स्कूलों में एक-एक अध्यापक को आपदा प्रबंधन सम्बन्धी प्रशिक्षण जरूर दिया जाए। इसके अलावा अन्य सम्बंधित विभागों के विषय में भी समीक्षा के दौरान आवश्यक निर्देश दिए। 

 केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित आपदाएं 

 बाढ़, सूखा, अग्निकांड, ओलावृष्टि, भूकंप, सुनामी, बादल फटना, कोहरा एवं शीतलहरी, चक्रवात, भूस्खलन, कीट आक्रमण, हिमस्खलन

 प्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित आपदाएं 
 बेमौसम भारी वर्षा अथवा अतिवृष्टि, आकाशीय विद्युत, आंधी- तूफान, लू-प्रकोप, नाव दुर्घटना, सर्पदंश, सीवर सफाई अथवा गैस रिसाव, बोरवेल में गिरना, मानव वन्य जीव द्वंद( जंगली जानवरों का हमला), कुआं, नदी, झील, तालाब, पोखर, नहर, नाला, गड्ढा, जलप्रपात में डूबकर होने वाली मृत्यु व सांड एवं वनरोज (नीलगाय) के आघात से होने वाली घटना

Barabanki News
Ways 
prevent
disasters
fire
floods
workshops

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ