Barabanki News... पत्रकारिता जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, आज उसी स्तंभ को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। खबरों की दुनिया में सच के लिए आवाज उठाने वाले पत्रकार आज खुद असुरक्षित हैं। सीतापुर में पत्रकार राघवेंद्र वाजपेयी की निर्मम हत्या ने न केवल पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया, बल्कि पूरे समाज में भय और आक्रोश की लहर दौड़ा दी है। इस जघन्य घटना (हत्या) के विरोध में सोमवार को वरिष्ठ पत्रकार आमिर अली और ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संतोष शुक्ला के नेतृत्व में पत्रकारों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित आठ सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी को सौंपा।
ज्ञापन में दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की गई, साथ ही यह भी आग्रह किया गया कि मृतक पत्रकार के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। पत्रकार राघवेंद्र वाजपेयी की हत्या यह दर्शाती है कि अपराधी अब उन लोगों को भी निशाना बना रहे हैं, जो समाज के लिए निडर होकर सच सामने लाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार मो आमिर अली ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है, जब किसी पत्रकार को अपनी कलम की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी हो। इससे पहले भी कई राज्यों में निर्भीक पत्रकारों की हत्या की खबरें सामने आती रही हैं। आज पत्रकार केवल खबरें कवर करने तक ही सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के अग्रणी योद्धा बन चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब यही योद्धा असुरक्षित हैं, तो समाज के अन्य नागरिकों की सुरक्षा की क्या गारंटी है? ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार शुक्ला ने इस घटना के खिलाफ कड़े शब्दों में नाराजगी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि यदि जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा।
हिन्दी पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पाटेश्वरी प्रसाद ने कहा कि पत्रकार राघवेंद्र वाजपेयी के परिवार को न केवल मुआवजा दिया जाए, बल्कि उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। उ.प्र. हिंदी पत्रकार एसोसिएशन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण कुमार द्विवेदी ‘राजू भैया’ ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारों पर हमलों की संख्या में इजाफा हुआ है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पत्रकारों की हत्याएं, धमकियां और हमले आम हो गए हैं। सरकार ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कई बार आश्वासन दिए हैं, लेकिन इन आश्वासनों का जमीनी हकीकत से कितना वास्ता है, यह घटनाएं खुद बयान करती हैं। एपजा के जिलाध्यक्ष अशोक तिवारी ने कहा कि समाज में सच लिखने और बोलने की कीमत बहुत अधिक हो गई है। सरकारों को चाहिए कि वे पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कानून बनाएं और यह सुनिश्चित करें कि पत्रकारों को किसी भी तरह की धमकी या हिंसा का सामना न करना पड़े।
ज्ञापन सौंपने के दौरान वरिष्ठ पत्रकार श्रुतिमान शुक्ला, रंजीत गुप्ता, शोभित शुक्ला, अलीम शेख, अंकित मिश्रा, मनीष सिंह, शिवम सिंह, राजकुमार सिंह, मुकेश मिश्रा, मोहम्मद उमैर, रणंजय शर्मा, उमेष श्रीवास्तव, मो. वसीक, सत्यनाराण गुप्ता, मोहम्मद अरशद, अशोक सैनी आदि कई पत्रकार मौजूद रहे।
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