Barabanki News... कुछ लोग इतिहास लिखते हैं, कुछ लोग इतिहास बनते हैं और कुछ विरली शख्सियत ऐसी होती है जिनके पीछे इतिहास चलता है। भारत की बेटी सुनीता विलियम्स ऐसा ही स्वर्णिम हस्ताक्षर हैं, जिसने अंतरिक्ष की पगडंडी पर ऐसे पदचिन्ह बना दिए है, जिन पर चलकर पूरी दुनिया महागाथा लिखेगी। 286 दिन अंतरिक्ष की महायात्रा से लौटी सुनीता ने जब धरती पर पाव रखा तो हर भारतवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। इस मौके पर गुरूवार को सेन्ट्रल एकेडमी ग्रुप ऑफ स्कूल्स के चेयरमैन डॉ. संगम मिश्र ने एक चित्र साझाा किया है।
यह चित्र साल 2012 का बताया जा रहा है जिसमें डॉ. संगम मिश्र ने एक समारोह के दौरान अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को अहमदाबाद में श्रीनाथ जी की प्रतिमा एवं उपरणा देकर सम्मानित किया था। तब उन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में उनके अप्रतिम कार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की थी। आज जब पूरा विश्व सुनीता विलियम्स की बहादुरी की कहानियां सुन रहे है। तब सेन्ट्रल एकेडमी ग्रुप ऑफ स्कूल्स के चेयरमैन डॉ. संगम मिश्र गर्व की अनुभूति कर रहे है। श्री मिश्र बताते हैं कि सुनीता ने साबित कर दिया कि आदमी मन से ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं। गोस्वामी तुलसीदास ने कोटि कोटि ब्रह्मांड की बात लिखी है और सनातन धर्म में ऐसे तमाम चरित्र है जो कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अपनी इच्छा शक्ति के दम पर विजित कर लेते हैं। सनातन की इसी शक्ति के दम पर सुनीता विलियम्स ने भी नीले आकाश पर शौर्य की लाल रेखाएं खींच दीं। अंतरिक्ष का सफर रोमांचक तो होता है लेकिन कई बार यह चुनौतीपूर्ण और अनिश्चितताओं से भरा भी साबित होता है। ताजा उदाहरण सुनीता विलियम्स और बूच विलमोर का है, जो आठ दिन के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन गए थे लेकिन वहां उन्हें पूरे 286 दिन बिताने पड़े। आखिरकार स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए वे सुरक्षित धरती पर लौट आए।
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