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UP: तकनीक और प्रौद्योगिकी के समुचित उपयोग से ही विश्व गुरु बनना संभव-राज्यपाल

 

Lucknow News... प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरूवार को शैक्षिक संचार संकाय (CEC), नई दिल्ली के तत्वाधान में लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय 26वें CEC-UGC शैक्षिक फिल्म महोत्सव का उद्घाटन किया। 

 राज्यपाल ने शैक्षणिक फिल्म फेस्टिवल में अपने संबोधन में शैक्षणिक फिल्म को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि ज्ञान, जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने फिल्म फेस्टिवल के मंच की सराहना की और कहा कि इसके माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया जाता है, जो युवाओं के बीच नए दृष्टिकोण को जन्म देते हैं। राज्यपाल ने डिजिटल तकनीक और शैक्षिक वीडियो के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान युग में इंटरनेट विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बन चुका है, जिससे उनकी शिक्षा अधिक इंटरएक्टिव, सुलभ और प्रभावी बन रही है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सही मार्गदर्शन और तकनीकी उपकरणों के उपयोग से विद्यार्थियों की समझ और ज्ञान गहरी होती है। 

राज्यपाल ने प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित ‘विकसित भारत’ के विजन पर चर्चा करते हुए कहा कि भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजिटल तकनीक को अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक ऐसे परिवेश का निर्माण करना चाहिए जो युवाओं को अपने प्रयासों से सफलता प्राप्त करने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करे। राज्यपाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) की महत्ता की चर्चा की और बताया कि भारत सरकार के बजट में ए.आई. आधारित शिक्षा और अनुसंधान के लिए प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों को डिजिटल फॉर्म में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

 नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में राज्यपाल ने कहा कि यह नीति सांस्कृतिक और मातृभाषा में शिक्षा देने का मार्ग प्रशस्त करती है और डिजिटल शिक्षा को मान्यता देती है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि देश को अमृत काल में विश्व गुरु बनाने का लक्ष्य केवल तब ही पूरा किया जा सकता है जब हम वर्तमान तकनीकी और प्रौद्योगिकी का सही तरीके से उपयोग करेंगे। राज्यपाल ने युवाओं को तकनीक के प्रति अपनी जागरूकता बढ़ाने और शैक्षिक सामग्री को डिजिटल मीडिया में समाहित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मल्टीमीडिया और आईसीटी उपकरणों का उपयोग छात्रों को अपने अध्ययन के तरीकों को चुनने में सक्षम बनाता है, जिससे शिक्षा का स्तर और अधिक ऊंचा हो सकता है। 

राज्यपाल ने कहा कि ऐसी शैक्षणिक फिल्में बनाना हमारी युवा पीढ़ी के ज्ञानवर्द्धन के लिए जरूरी है। शैक्षणिक फिल्में हमारी सोच, विचार, संस्कृति और परंपरा के बारे में जानने का एक उत्कृष्ट माध्यम हैं। 

 राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों को इस शैक्षिक फिल्म महोत्सव में भाग लेने और ऐसे प्रेरक विषयों पर फिल्में बनाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे युवा पीढ़ी सकारात्मक विचारों से अवगत हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश में शैक्षिक क्षेत्र में निरंतर बदलाव आ रहे हैं। विश्वविद्यालयों को अनुदान दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी बच्चों के लिए मातृभाषा में शिक्षा की व्यवस्था की गई है, ताकि वे अपनी मूलभूत शिक्षा को अच्छे से समझ सकें। एक अच्छे आधार के रूप में मातृभाषा को प्राथमिकता देने से बच्चों की सोच में व्यापक बदलाव आएगा। छोटे बच्चों की कैचिंग पावर भी अत्यधिक होती है, जिससे वे जल्दी सीखते हैं।

उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे कार्यों के माध्यम से बचपन में ही बच्चों में बदलाव लाया जा सकता है। शैक्षिक फिल्मों से अच्छे विचारों को फैलाना एक कठिन लेकिन बेहद प्रभावी तरीका है, और समाज को जागरूक करने के लिए ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जाना चाहिए। 

राज्यपाल ने कहा कि हमारी समृद्ध विरासत और संस्कृति को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। देश अहिल्याबाई का जन्म शताब्दी मना रहा है, ऐसी महान विभूतियों के जीवन और उनके योगदान को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए शैक्षिक फिल्मों का निर्माण आवश्यक है। एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस मनाए जा रहे हैं, जिससे राज्यों के सांस्कृतिक, खानपान, संगीत, कला और अन्य पहलुओं को समझने का अवसर मिलता है। यह पहल देश में एकता और अखंडता को बढ़ावा देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 

इस अवसर पर डिजिटल शिक्षा की उपयोगिता पर आधारित एक डाक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गयी तथा महोत्सव को सी0ई0सी0 के निदेशक प्रोफेसर जी0बी0 नड्डा एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक राय ने भी संबोधित किया। 111 विदित है कि शैक्षिक फिल्म महोत्सव में पर्यावरण विकास, मानवाधिकार और स्वच्छ भारत जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित 18 चुनिंदा फिल्में दिखाई जाएगी। यह फेस्टिवल 22 मार्च तक चलेगा। इस अवसर पर सीईसी के निदेशक प्रोफेसर जी0बी0 नड्डा, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय, विश्वविद्यालय के शिक्षक गण विद्यार्थी आदि उपस्थित रहे।


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