-एल.एस. हरदेनिया, संयोजक-राष्ट्रीय सेक्युलर मंच
आप अपना दोस्त चुन सकते हैं परन्तु पड़ोसी तो स्वभाविक ही होता है। अटल बिहारी वाजपेयी के इन शब्दों को याद करते हुए दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बातचीत हुई। इस बातचीत में भारत और पाकिस्तान के अनेक प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया। जिन लोगों ने इस बातचीत में भाग लिया उनमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और अनेक प्रमुख व्यक्ति शामिल थे।
इन सब प्रमुख व्यक्तियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत फिर से शुरू की जाए। इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण किताब का विमोचन भी किया गया। किताब का शीर्षक था ‘‘शांति की खोज और भारत और पाकिस्तान के रिश्ते’’। इस किताब में 52 लेख शामिल हैं, जो दोनों देशों के अनेक विद्वानों ने लिखे हैं। इन विद्वानों में कूटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ, नेता और चिंतक शामिल हैं। इन सारे लेखों में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत चलती रहनी चाहिए। इस किताब का विमोचन पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किया।
अपने भाषण में अंसारी ने कहा कि ये दोनों देश भारत और पाकिस्तान, एक तरह के एक्सीडेंट से बने हैं। ये ऐसे देश नहीं हैं जिनका कोई लंबा इतिहास हो। ये सिर्फ दुर्घटनावश बने थे।
अंसारी के बाद अनेक नेताओं ने अपने विचार प्रकट किए। सबने इस बात पर जोर दिया कि हर हालत में भारत और पाकिस्तान के बीच में बातचीत चलती रहनी चाहिए। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सबसे बड़ी जरूरत यह है कि हम एक-दूसरे से घृणा करना बंद कर दें। हम एक थे और अब एक नहीं हैं। हमें घृणा ने विभाजित कर दिया, घृणा ने ही हमें भारत और पाकिस्तान बना दिया। फारूक अब्दुल्ला ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचार को उद्धृत करते हुए कहा कि ‘‘हम दोस्त चुन सकते हैं पर पड़ोसी नहीं।’’
पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव जलील अब्बास जिलानी ने कहा कि हमें ऐसी आवाजें सुनना चाहिए जो शान्ति की हों और जो दोस्ती की हों। जिलानी पाकिस्तान के विदेश सचिव तो रहे ही वे कुछ समय के लिए वहां के विदेश मंत्री भी रहे। उन्होंने उन मुद्दों का उल्लेख किया जो भारत और पाकिस्तान की दोस्ती के रोड़े हैं। उन्होंने भी वाजपेयी जी के वर्ष 2003 में दिए गए एक भाषण का उल्लेख किया। वाजपेयी जी ने कहा था कि ‘‘भारत और पाकिस्तान की दोस्ती इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत पर आधारित है।’’
पाकिस्तान के पूर्व सूचना मंत्री जावेद जब्बार ने भी इस बात पर जोर दिया कि भले ही बंदूकें चलती रहें, तोपों से गोले बरसते रहें परन्तु बातचीत होती रहना चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार इम्तियाज आलम ने कहा कि सार्क देशों के बीच बातचीत फिर से चालू होनी चाहिए। ये बातचीत किसी ऐसे देश में होनी चाहिए जिनके भारत और पाकिस्तान से दोस्ताना संबंध हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने अभी हाल में पाकिस्तान अपनी किक्रेट टीम भेजने ने इंकार कर दिया था। यह एक दुखद घटना है। बाद में दोनों देशों की टीमें दुबई में खेलीं। ऐसा नहीं होना चाहिए।
कुल मिलाकर इन दोनों देशों के नेताओं, चिंतकों की यह बातचीत दोनों देशों की दोस्ती में मील का पत्थर साबित होगी।
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