Barabanki News... शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन टिकैत के बैनर तले किसानों ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने नगर के गन्ना दफ्तर तक रेली निकाली और फिर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत की तरफ से डीएम और सीएमओ को प्रेषित ज्ञापन में निजी एवं सरकारी चिकित्सालयों में मरीजों के साथ लापरवाही और अनियमिताओं की बात कही गई है। ज्ञापन में निजी चिकित्सालय और क्लीनिकों में अनाधिकृत रुप से चिकित्सा परामर्श शुल्क ₹500 से ₹1000 मनमाने ढंग से वसूलने पर रोक लगाने, मरीज की चिकित्सा के दौरान मृत्यु होने पर किसी प्रकार का धनउगाई न करने, अनधिकृत निजी अस्पताल एवं मेडिकल स्टरों को तुरंत बंद करने, मेडिकल स्टोर पर बड़े पैमाने पर नकली एवं नशीली दवाइयों की कालाबाजारी पर शासन स्तर द्वारा उचित स्तरीय जांच टीम गठित कर छापामार अभियान कर मेडिकल स्टोर एवं झोलाछाप डॉक्टरों के प्रति कड़ी से कड़ी करवाई करने की मांग की गई है।
वहीं मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्रवेश में जनपद के शैक्षिक संस्थानों के द्वारा की जा रही अनिमियताओं का जिक्र किया गया है। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है कि गरीब तबके के छात्रों की निःशुल्क शिक्षा हेतु केंद्र सरकार ने शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत शिक्षण को अनिवार्य करते हुए सभी निजी शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश का अधिकार दिया गया है, जिसके तहत शैक्षणिक संस्थानों को कुल छात्रों में कमजोर आय वर्ग के 25% छात्रों का प्रवेश अनिवार्य किया गया है, किन्तु संज्ञान में आया है कि निम्नवत रूप से उल्लखित बिन्दुओ का पालन निजी विद्यालयों द्वारा नहीं किया जा रहा है ।
1. जनपद में शिक्षा विभाग द्वारा मान्यता प्रास एवं पंजीकृत विद्यालयों द्वारा शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निर्धारित 25% प्रवेश का पालन नहीं किया जा रहा है
2. पंजीकृत/मान्यता प्राप्त विद्यालयों द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 का उत्बंधन करने वाले शिक्षण संस्थानों पर शिक्षा विभाग द्वारा कोई ठोस कार्यवाई नहीं किया गया है।
3. शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 को भ्रष्टाचारी शिक्षण संस्थानो द्वारा सरकार से मिलने वाली अनुदान राशि को छात्रों की फर्जी सूची के आधार पर गबन किया जा रहा है जिससे हजारों छात्रों को शिक्षा से वंचित रखते हुए सरकारी धन का बन्दर बाट कर अनिवार्य शिक्षा के प्रति सरकार की मंशा पर कुठाराघात किया जा रहा है।
4. शिक्षा अधिकार अधिनयम 2009 के तहत गरीब बच्चो का 25% प्रवेश निजी विद्यालयों द्वारा किया जाना अनिवार्य है, किंतु इससे बचने के लिए कुछ निजी विद्यालय सरकारी पोर्टल पर खुद को बंद दर्शा रहे है, जबकि उक्त विद्यालय का अनवरत संचालन हो रहा है।
5. जनपद में पंजीकृत / गैर पंजीकृत सभी संचालित विद्यालयों में शिक्षा अधिकार अधिनियम में वर्णित नियमों का पालन किया जाय अन्यथा की दशा में विद्यालयों के संचालन पर विभाग द्वारा रोक लगाया जाय ।
6. निःशुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत जनपद के विद्यालयों को सरकार द्वारा जारी सहयोग राशि की सम्पूर्ण सूची उपलब्ध करवाया जाए ।
7. उक्त अधिनियम का पालन न करने वाले विद्यालयों की सूची को सार्वजनिक करते हुए उनके विरुद्ध हुई कार्यवाही का विवरण सार्वजनिक किया जाय ।
8. निजी विद्यालयों द्वारा प्रत्येक वर्ष चेंज हो रहे पाठ्यक्रम पर प्रतिबंध लगाते हुए सम्पूर्ण विद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम लागू किया जाय ।
9. विद्यालयों में फीस बकाया के उपरान्त छात्रों को अपमानित किए जाने की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए उन्हें परीक्षा से बंचित किए जाने की निरकुंशता पर रोक लगाया जाए
10. विद्यालय प्रबंध तंत्र द्वारा चिन्हित प्रतिष्ठानी से ड्रेस एवं स्टेशनरी खरीदे जाने के दबाव को रोका जाए। जिससे कि शिक्षा में व्यवसायीकरण को रोका जा सके ।
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