Barabanki News... नगर में पुराने बस स्टॉप से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर जवाहर लाल नेहरू डिग्री कॉलेज से के सामने और उसके आसपास के क्षेत्र में सड़क के किनारे चबूतरों पर बनीं अस्थाई दुकानों को लोगों ने हटाना शुरू कर दिया है। नए डीएम शशांक त्रिपाठी ने निरीक्षण कर इन दुकानों को अतिक्रमण बताते हुए हटाने का निर्देश दिया था। उसके बाद से दुकानदारों ने खुद अपनी दुकानें हटानी शुरू कर दी हैं। वहीं नगर पालिक नवाबगंज के पूर्व चेयरमैन इस कार्रवाई को गलत बता रहे हैं। उनका दावा अलग है और वो पूरी कार्रवाई के लिए सरकार तक को कटघरे में खड़े कर रहे हैं।
आपको बता दें कि शुक्रवार से ही जेनेम्सा रोड पर चबूतरों पर बनी अवैध और अतिक्रमण कर बनाई गईं लोहे की दुकानें, दुकानदारों द्वारा स्वयं हटाई जाने लगी थीं। शान्ति व्यवस्था बनी रहे इसके लिये पुलिस, प्रशासन व नगर पालिका के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे थे। प्रशासन के मुताबिक नगर के बस स्टेशन से पुलिस लाइन चौराहे तक सब्जी की दुकान लगाने के लिये आवंटित चबूतरों पर शर्तो का उल्लंघन करके लोहे की पक्की दुकानें बना ली गई थीं। इसके बाद सब्जी विक्रेता सड़क किनारे पटरी पर अपनी सब्जी की दुकानें लगाने लगे थे। पटरी पर जगह न बचने के कारण ग्राहक अपने वाहन सड़क किनारे खड़ा करते हैं, जिससे बस स्टेशन से जवाहर लाल नेहरू परास्नातक महाविद्यालय के सामने होते हुए पुलिस लाइन चौराहा तक जाम की स्थिति बनी रहती है। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने 6 फरवरी को निरीक्षण कर शर्तो का उल्लंघन करके चबूतरों पर बनी लोहे की दुकानों को हटाने के निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिए थे। जिसके बाद ईओ नगर पालिका द्वारा सम्बंधित दुकानदारों को समय देते हुए चबूतरों पर बनी लोहे की दुकानों को स्वयं से हटाने के निर्देश दिए गए थे। जिसके चलते शनिवार को भी दुकानदार स्वयं से अपनी लोहे की दुकानों को हटाते नजर आए। साथ ही अवशेष व मलवे को जेसीबी मशीन से हटाकर चबूतरे को समतल किया जा रहा है। इस मौके पर तहसीलदार शरद सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद नवाबगंज, संजय कुमार शुक्ला, सीओ हर्षित चौहान, कोतवाल नगर सहित सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे थे।
ये तो हो गई प्रशासन की बात। अब आपको इस मुद्दे पर पूर्व चेयरमैन और निवर्तमान चेयरमैन के पति रंजीत बहादुर श्रीवास्तव प्रतिक्रिया सुनाते हैं। एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को दिए गए साक्षात्कार में रंजीत बहादुर श्रीवास्तव इन दुकानों को पूरी तरह से अवैध बता रहे हैं। वो पूरी कार्रवाई को तमाशा तक बता रहे हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के सवाल पर वो कहते हैं कि क्या मैंने गल्त किया था। उन्होंने कहा कि छाया के दुकानदार हाईकोर्ट के आदेश से हटाए गए थे, तो उनको हमने दो जगह स्थान दिया था। एक कमला नेहरू पार्क के पास और दूसरा जनेस्मा कॉलेज के पास। उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई नियमानुसार की गई थी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन डीएम योगेश्वर राम मिश्रा से आदेश कराकर बोर्ड के निर्णय के मुताबिक ये कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि पालिक प्रशासन की तरफ से 10 फिट की लंबाई में चबूतरा दिया गया था। उन्होंने कहा कि इसका 47 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से किराया लिया जाता था और उनको अस्थाई निर्माण की भी अनुमति मैनें दी थी। उन्होंने कहा कि मेरी ही सरकार में गरीबों का उत्पीड़न हो रहा है। ये दुर्भाग्यपूर्ण है। ये नहीं होना चाहिए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर वो होते तो किसी का आदेश नहीं मानते।
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