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Barabanki: बौद्धिक और चरित्र निर्माण की पाठशाला है संघ की शाखा-दुर्गेश

 

Barabanki New... राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा स्थानीय जीआईसी ग्राउंड पर रविवार को शाखा संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें नगर में जगह-जगह लगने वाली सभी 26 बस्तियों की शाखाओं को एक साथ लगाने का अभिनव प्रयोग हुआ। सभी शाखाओं के मुख्य शिक्षक एवं शाखा कार्यवाह अपने ध्वज एवं सैकड़ों स्वयंसेवकों को लेकर कार्यक्रम स्थल पर एकत्रित हुए। एक ही प्रांगण में इतनी शाखा एवं उनके ध्वज उपस्थित लोगों का मन मोह रहे थे। 

 स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए आरएसएस के प्रांतीय सह सद्भावना प्रमुख दुर्गेश ने कहा कि आरएसएस की शाखा में व्यक्ति का बौद्धिक विकास व चरित्र निर्माण होता है। साथ ही स्वयंसेवक अनुशासन सीखते हैं। बाल, तरुण, प्रौढ़ सभी वर्ग के लोग इसमें शामिल होकर आपस में सामंजस्य स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि शाखा में स्वयंसेवक सामाजिक समरसता, देश की सभ्यता व संस्कृति से परिचित भी होते हैं। उन्होंने कहा कि शाखा में भाग लेने से व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से सबल बनता है। शाखा पर प्रतिदिन फहराए जाने वाले भगवा ध्वज को उन्होंने सनातन धर्म व संस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने बताया कि शाखा में ध्वज फहराने के पश्चात सूर्य नमस्कार, योग, व्यायाम, खेल, देशभक्ति के गीत होते हैं जिससे लोगों में राष्ट्रप्रेम का भाव जागृत होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने में आरएसएस के स्वयंसेवकों की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि संघ संस्थापक डॉ हेडगेवार की 1925 में शुरू की गई शाखा का यह शताब्दी वर्ष है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम् भारत का दर्शन है और सर्वे भवन्तु सुखिनः भारत की सनातन परंपरा रही है। विश्व कल्याण के लिए भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि भेदभाव मुक्त समरस समाज की स्थापना संघ का लक्ष्य है। 

इस दौरान वंदे मातरम, भारत माता की जय, हर-हर बम-बम के नारों की गूंज दूर तक फैलती रही। अध्यक्षता इंद्र राज ने की। संघ प्रार्थना नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमे ' के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर सह विभाग प्रचारक अमरजीत , नगर प्रचारक विभम, विष्णु प्रताप, प्रभात, शुभम, पारितोष ,अमितेश, शिवम ,दिनकर आदि मौजूद रहे।

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