मो. उमैर
Barabanki News... विधानसभा में चुनाव में भले ही अभी दो साल बचे हों, लेकिन सपा कार्यकर्ताओं ओर पदाधिकारियों ने टिकट की जुगत में तैयारियां तेज कर दी हैं। नई हवा और कयासों की वजह से इस बार कुर्सी के अलावा सदर और रामनगर विधानसभा सीट SP में टिकट की चाह रखने वालों के लिए हॉट सीट बन गई है। कुर्सी के अलावा रामनगर और सदर में सपा का सिटिंग MLA होने के बावजूद दर्जनों के तादाद में टिकटार्थी पसीना बहाने में लगे हुए हैं।
दरअसल 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए सपा के अंदर कई तरह के कयास और अफवाह गर्म है। सबसे ज्यादा अफवाह रामनगर विधानसभा क्षेत्र को लेकर है। SP में यहां को लेकर कई तरह की अफवाहें हैं। पहली अफवाह तो ये है कि रामनगर के मौजूदा विधायक फरीद महफूज किदवाई की बढ़ती उम्र और कमजोरी की वजह से अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। एक अफवाह ये भी है कि वो दोबारा कुर्सी में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं। कुछ लोगों का ये भी मानना है कि पिछले दिनों उनकी जिस तरह से सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नजदीकियां बढ़ीं हैं, उससे वो अपने या अपने बेटे के लिए रामनगर छोड़कर कोई भी सीट आसानी से हासिल कर लेंगे। इन अफवाहों के मद्देनजर रामनगर विधानसभा क्षेत्र में सपा नेताओं ने टिकट की चाहत में कोशिशें तेज कर दी हैं।
इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व ब्लाक प्रमुख यासिर आरफात किदवाई ने सोमवार को रामनगर विधानसभा के कई गांवों में सम्पर्क कर पार्टी की नीतियों और सिद्धांतो का बखान किया और प्रदेश की किसान एवं नवजवान विरोधी सरकार को सत्ता से हटाने के लिए पार्टी को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने रामनगर विधानसभा क्षेत्र के रामपुर, बदोसराय, किंतुर में उन्होंने ताबड़तोड़ जनसम्पर्क कर सपा को मजबूत करने की अपील की।
दरअसल रामनगर और कुर्सी के जातीय समीकरण की वजह से मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए दोनों सीटें पहली पसंद है। दोनों सीटों पर मुस्लिम के अलावा ओबीसी मतदाता भारी तादाद में है। इसलिए उन्हें ये ये दोंनों सीटें अपने लिए मुफीद लग रही हैं। पिछली बार कुर्सी विधानसभी सीटे के लिए सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने आवेदन किया था। इस बार सपा के कई स्टार नेताओं के अलावा छोट भइये नेता भी इस सीट के लिए जुगत में लगे हुए हैं।
सबसे चौकाने वाला मसला सदर विधानसभा सीट का है। ये सीट सपा के यादव बिरादरियों के लिए पहली पसंद है। MY समीकरण के दम पर जीत सुनिश्चित करने की उम्मीद में यहां से सपा के तीन बार के लगातार विधायक धर्मराज सिंह यादव उर्फ सुरेश यादव के सामने चुनौती खड़े कर रहे हैं। टिकट की चाह में इस विधासनसभा क्षेत्र से कई यादव नेता लगातार जमीन पर काम कर रहे हैं। अब देखना ये है कि इऩमें से कोई दूसरा सुरेश यादव का टिकट काट पाता है, या सुरेश पार्टी आलाकमान का भरोेसा जीतने में कामयाब रहते हैं।
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दरअसल किसी भी पार्टी के नेता, कार्यकर्ता या पदाधिकारी का ये व्यक्तिगत फैसला होता है कि वो चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोंके और कोशिशें करें। ये उनका अधिकार है, लेकिन सपा जैसी पार्टी जिसमें सेंकेंड लाइन लीडरशिप या लीडरशिप की नई पौध रोपने की परंपरा नहीं है। वहां ये नेता टिकट पाने में कितना और कैसे कामयाब हो पाते हैं, ये देखने की बात होगी। देखना ये भी होगा कि टिकट की जुगत में लगे छोटे नेता या कार्यकर्ता किस दिग्गज या किस बड़े नेता के बेटे का टिकट कटवा पाने में कामयाब होते हैं।
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