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UP: 5 दुग्ध संघों के महाप्रबंधकों पर गाज, दुग्ध उपार्जन में प्रगति न करने पर रोका गया वेतन

 

Lucknow News... उत्तर प्रदेश के दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने दुग्ध उपार्जन में अपेक्षित प्रगति न किए जाने पर दुग्ध संघ मथुरा, गोण्डा, कानपुर, मेरठ तथा अलीगढ़ के महाप्रबंधकों का एक माह का वेतन रोके जाने के निर्देश दिए है। श्री सिंह ने कहा कि किसी भी योजना में लक्ष्य प्राप्ति या विलम्ब होने पर संबंधित का तत्काल वेतन रोक दिया जायेगा। सिंह ने कहा कि 31 मार्च 2025 तक प्रत्येक दशा में सभी किसानों का शत-प्रतिशत बकाया दुग्ध मूल्य भुगतान सुनिश्चित किया जाए। निर्धारित अवधि तक भुगतान जीरो पेमेंट न आने पर अधिकारी कड़ी कार्यवाही के लिए तैयार रहे। श्री सिंह ने कहा कि प्रत्येक माह दुग्ध समितियांं के गठन/पुनर्गठन की संख्या बढ़ाई जाए और पराग के दुग्ध उपार्जन एवं तरल दुग्ध विक्रय में वृद्धि की जाए।

सिंह ने यह निर्देश सोमवार को लखनऊ में PCDF सभागार में आहूत दुग्ध विकास एवं पशुधन विकास की बैठक में दिए। सिंह ने वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी दुग्ध महासंघों के महाप्रबंधकों से गठन/पुनर्गठन के सापेक्ष संचालित दुग्ध समितियां, दुग्ध समितियों के भ्रमण, डेयरी प्लांट की उपयोगिता क्षमता, दुग्ध उपार्जन तरल दुग्ध बिक्री बकाया एवं दुग्ध मूल्य भुगतान की स्थिति के संबंध में विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा- निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी महाप्रबंधक आवश्यक रूपरेखा तैयार करके मार्केटिंग के कार्यों पर विशेष ध्यान दे। बिना उचित मार्केटिंग के लाभ नही होगा जिससे पराग के उत्पादों की बिक्री प्रभावित होगी। किसानों का विश्वास आज भी पराग के साथ है इसलिए हमें दुग्ध समितियों के गठन, नियमित समय पर भुगतान, किसानों के प्रशिक्षिण कार्यक्रमों को पूरी गंभीरता से पूरा करना होगा। 

दुग्ध विकास मंत्री ने कहा कि दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने के लिए समितियों की संख्या निरंतर बढ़ाकर उन्हें मजबूत किया जाए। निष्क्रिय समितियों को क्रियाशील कर उन्हें संचालित किया जाए। वर्तमान में संचालित समितियों को किसी भी कारण से बंद न होने पाए। किसानों एवं पशुपालको का हित राज्य सरकार की प्राथमिकता में है और इन कार्यों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता न बरती जाए। पशुपालकों एवं किसानों को प्रशिक्षित किया जाए और उन्हें दुग्ध उत्पादक की नई तकनीको व नई जानकारियों से सांझा कराने का कार्य किया जाए ताकि प्रति पशु दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि हो सके। श्री सिंह ने देशी नस्ल के गायों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। श्री सिंह ने विभिन्न योजनाओं में आवंटित बजट व व्यय के विवरण की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि माह फरवरी, 2025 तक बजट का सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए और अधिकारी सभी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु आवंटित धनराशि का निर्धारित समय में उपयोग करे। बैठक में बताया गया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में कुल 18,913 निबंधित समितियों के सापेक्ष 7564 समितियां कार्यरत हैं। जिला योजना अंतर्गत 220 दुग्ध समितियों के गठन एवं 450 दुग्ध समितियों का पुर्नगठन कार्य पूर्ण। औसत दुग्ध उपार्जन प्रतिदिन 3.57 एलकेजीपीडी रहा। औसत तरल दुग्ध बिक्रय प्रतिदिन 1.84 एलएलपीडी रहा। प्रत्येक दुग्ध संघ द्वारा दुग्ध समितियों का भ्रमण एवं अनुश्रवण किया गया, जिसमें 27 अगस्त 2024 से 30 जनवरी 2025 तक 2961 कार्यरत एवं 1169 अकार्यरत दुग्ध समितियों मं भ्रमण कार्य किया गया। 

 बैठक में दुग्ध विकास विभाग के प्रमुख सचिव के0 रवीन्द्र नायक ने मंत्री को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसानां एवं पशुपालकों को दुग्ध मूल्य का भुगतान में कोई विलम्ब नहीं किया जायेगा। उन्होंने अधिकारियों को समितियों की संख्या बढ़ाये जाने के संबंध में पूर्ण गंभीरता एवं तत्परता से कार्य किये जाने के निर्देश दिये। प्रमुख सचिव ने बैठक में डेलोएट कंपनी द्वारा पशुधन एवं दुग्ध विकास हेतु दिए प्रस्तुतीकरण पर भी अपने निर्देश दिए। बैठक के उपरांत आनंन कुमार सिंह, आईएएस (सेवानिवृत्त)/पूर्व प्रबंध निदेशक, पीसीडीएफ का सेवानिवृत्त उपरान्त बुके तथा मामेन्टों देकर सम्मानित किया गया।

 बैठक में पशुधन विभाग के विशेष सचिव देवेन्द्र पांडेय, दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव श्राम सहाय यादव, दुग्ध आयुक्त श्राकेश कुमार मिश्रा, पशुपालन निदेशालय के निदेशक(रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र) डॉ. योगेन्द्र सिंह पवार, सीईओ एलडीबी डॉ0 नीरज गुप्ता, पीसीडीएफ के डा मनोज तिवारी, डा राम सागर सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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