Lucknow News... “न्यायालय” एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही व्यक्ति के अंदर यह विश्वास आता है कि यहाँ मेरा पक्ष सम्मानजनक तरीके से सुना जायेगा और गुण-दोष के आधार पर फैसला होगा, लेकिन यहाँ तो पारिवारिक न्यायालय या बाकी न्यायालय “महिला कानून” लेकर चल रही हैं, जहाँ वे महिला सशक्तिकरण की बजाय पुरुष उत्पीड़न पर आमादा हो चुकी हैं। अब तो प्रदेश में “महिला अदालत” भी गठित कि जा रही है जहाँ पुरुष पक्ष को न्याय कि कोई उम्मीद नहीं हैं। उक्त विचार MARD (मर्द) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कपिल मोहन चौधरी ने राजधानी के यूपी प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान व्यक्त किए। पुरुषों की व्यथा की दशा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि सन 1560 से 1562 तक बादशाह अकबर का शासनकाल “पेटीकोट शासन” कहलाता है, लेकिन सन 1850 से अब तक महिलावादी व्यवस्था जारी है, जहाँ महिला कानून बनाकर सिर्फ पुरुष (व उसके परिवार कि महिलाओं) को सजा देने के प्रावधान बनाये जा रहे हैं। यहाँ तक कि 22 सितम्बर 2022 में सिर्फ महिला विधायकों को बोलने का अवसर देकर पुरुषों के अग्रिम जमानत तक का, न्याय का रास्ता बंद करने का, कानून बनाया गया।
चौधरी ने कहा कि हिन्दू विवाह का आधार सप्तपदी है। जहाँ वर वधू एक दूसरे को सात वचन देते हैं। न्यायालय को सिर्फ वर द्वारा वधू का खर्चा उठाने वचन दिखता है, लेकिन उसी समय वधू द्वारा सास-ससुर की सेवा, पति को खुश रखने व पर-पुरुष सम्बन्ध न रखने का जो वचन दिया गया था, उससे पत्नी को कानूनन मुक्ति दे रखी है। नतीजा यह है कि आज पति पर दहेज़ उत्पीड़न आदि का 99% तक का झूठा आरोप लगाकर, ससुर देवर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाकर पत्नियाँ मायके बैठ रही हैं और अपनी आय, संसाधन छिपाकर पति से गुजाराभत्ता के नाम पर मोटी रकम का खेल कर रही हैं। चौधरी ने कहा कि 04 नवम्बर 2020 से रजनीश बनाम नेहा में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन और सजा की घोषणा के बावजूद भी आज पत्नियाँ कोर्ट के संरक्षण में अपनी आय व संसाधन छिपाकर, झूठ लिखकर और मात्र शादी के आधार पर जीवनभर मायके बैठकर पति से गुजाराभत्ता हक के नाम पर ले रही हैं। उन्होंने कहा कि 04 नवम्बर 2020 के बाद से देशभर में लाखों मुकदमें पारिवारिक न्यायालय में दर्ज हुये, लेकिन अदालत में शायद ही 0.01% महिला को रजनीश बनाम नेहा गाइडलाइन के तहत झूठा मुकदमा दायर करने पर सजा हुई हो, लेकिन लाख से ज्यादा पतियों को गुजाराभत्ता के नाम पर, पत्नी को मुफ्त रुपया न देने के आरोप में जेल भेजने के आदेश जरुर दिये गये| सिर्फ शादी करना मात्र ही पति को दोषी बताकर उसे न्यायालय द्वारा “शादी का अपराधी” बनाया जा रहा है, और पत्नी के झूठ पर उसे सजा नहीं हो रही है।
इसी तरह अभी 09 दिसम्बर 2024 को एक आई.टी. इंजिनियर अतुल सुभाष मोदी द्वारा आत्महत्या से पहले लगभग 80 मिनट का वीडियो व 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा गया, जिसमें पत्नी व ससुराल के अलावा न्यायपालिका को अपनी आत्महत्या का जिम्मेदार बताया गया व न्यायिक भ्रष्टाचार की काली सच्चाई को उजागर किया गया, जो आज बहस का विषय बना हुआ है। अतुल सुभाष जैसे कई पति आज भी महिलावादी अदालतों व कानूनों द्वारा प्रताड़ित हैं और न्यायालय “शादी के अपराधी” घोषित किये जाने से आत्महत्या कर लेने पर मजबूर किये जा रहे हैं।
मर्द पार्टी के इस 4 घंटे के कार्यक्रम में कई पति शामिल हुए, जिन्होंने अपनी व्यथा बताई।
केस 1 - सोनभद्र से कृष्ण कुमार तिवारी - शादी डॉट कॉम के जरिये परिचय व दिसम्बर 2019 में आर्य समाज मंदिर में बिना दान-दहेज के शादी की, फिर सामाजिक शादी के बाद चौथी कि विदाई तक मात्र 6 दिन पत्नी ससुराल में रही व पति पर लखनऊ रहने का दबाव बनाया गया। दो साल बाद पत्नी को समझाने के लिए पति जब लखनऊ एक-दो महीने के लिये आया तो बाद में एक बेटा भी हो गया (बेटी होती तो बेटी होने के कारण पत्नी-प्रताड़ना के आरोप भी लगते)। उसके दो साल बाद दिसम्बर 2023 में पत्नी ने अपने गुज़राभाता के वाद में, अपनी ब्यूटी पार्लर व अर्बन कंपनी से 15 से 30 हजार की बैंक में प्राप्त आमदनी को झूठे शपथपत्र देकर छिपाया और पति की लगभग 16,000 प्रतिमाह आमदनी को 80,000 प्रतिमाह (40,000/- नौकरी व 10 बीघा जमीन बताकर रू. 40,000 प्रतिमाह आमदनी प्रतिमाह बताकर) पत्नी द्वारा रु० 35,000/- (30 हजार अपने व 5 हज़ार बच्चे के लिये)। चूँकि जहाँ झूठे शपथपत्र पर ट्रायल के बाद भी पत्नी को सजा प्रतिशत 0.01 भी नहीं है वहां न्यायालय से बहस की बजाय पत्नी को उसके द्वारा बताया गया 10 बीघा खेत लगी फसल के साथ पहली ही पेशी फरवरी 2024 को दे दिया गया व पत्नी से अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट लाने को कहा गया| न्यायालय ने विगत 10 माह में पत्नी से उसका बैंक स्टेटमेंट मंगाने कि बजाय 07 दिसम्बर 2024 के आदेश में पति पर लगभग 72 हजार रूपये का अंतरिम गुज़ाराभत्ता बकाया जारी किया गया और अगली महीने जनवरी 10 तारीख से पहले ही 6 जनवरी को पति के खिलाफ रिकवरी वारंट भी जारी कर दिया गया, लेकिन पत्नी से उसका बैंक स्टेटमेंट आज तक नहीं मंगाया गया।
केस-2. सुरेन्द्र कुमार यादव : आर्मी जवान : भाई वीरेन्द्र यादव ने बताया कि उसके भाई की शादी मात्र 6 दिन चली, जिसमें पति से कोई सम्बन्ध नहीं बना। अदालत पर प्रेमी के साथ आती हैं और कोर्ट के आदेश पर विगत कई वर्षों से तनख्वाह से रूपये व अन्य सुविधाएँ ले रही है और ट्रायल के नाम पर कई वर्षों से सैनिक का उत्पीड़न किया जा रहा है।
केस-3 योगेश कुमार:शिक्षक: लखीमपुर खीरी ने - भी अपना कुछ इसी तरह का दर्द बयान किया।
केस-4 सोनू राय व अन्य : गोरखपुर-देवरिया सोनू राय व अन्य पीड़ित लोगों ने मंच से अपना दर्द रखा और बताया कि किस तरह हिन्दू सप्तपदी की धज्जी उड़ाकर पतियों को “शादी का अपराधी” बताकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा हैं।
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