Barabanki News... प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत मजदूरों को गम्भीर बीमारी में इलाज के लिये योजना का लाभ मिलना चाहिए। 60 साल की उम्र होने पर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा दिये जाने तथा 3000 हजार रूपये की पेंशन का प्राविधान है, लेकिन इस सुविधा का लाभ कितने मजदूरों को मिल रहा है, ये विचारणीय प्रश्न है। श्रमिकों को गम्भीर बीमारी के इजाल के लिये राजधानी लखनऊ जाना पड़ता है। जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। श्रमिकों के इलाज के लिये जनपद मुख्यालय पर एक श्रमिक अस्पताल का निर्माण होना चाहिए, जिससे उन्हें सही समय पर सही इलाज मिल सके। प्रशासन जगह उपलब्ध कराये तो छाया चौराहे पर मेरे द्वारा सांसद निधि से एक एैसा शेडयुक्त बरामदा श्रमिकों के लिये निर्माण कराया जायेगा। जिसमें वो आसानी से खड़े होकर काम मिलने का इंतजार कर सके।
उक्त विचार स्थानीय सांसद तनुज पुनिया ने सोमवार को कलेक्ट्रेट के लोकसभागार में आयोजित श्रम एवं उद्योग बंधु की संयुक्त बैठक में व्यक्त किए। बैठक में मुख्य रूप से उपायुक्त उद्योग आशुतोष श्रीवास्तव, सहायक श्रमायुक्त मयंक सिंह तथा प्रबन्धक कौशल विभाग के साथ-साथ दर्जनों की संख्या में श्रम संगठन एवं उद्यमी बंधु मौजूद थे।
सांसद तनुज पुनिया ने सुझाव दिया कि, सरकार को श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिये और उनके आगे आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिये श्रमिक कानून एवं कोड की समीक्षा करके बदलाव किये जाने की जरूरत है। जैसा कि, बेज कोड 2019 में देश के 50 करोड़ मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी की गारण्टी देता हैं, जिसमें पुरूष एवं महिला श्रमिकों को समान वेतन एवं समय से वेतन उपलब्ध कराये जाने का प्राविधान है, लेकिन आज भी श्रमिकों को न तो समय से वेतन मिल पा रहा है और महिला पुरूष में समान वेतन न मिलने की सिकायतें मिल रही हैं,जो तत्काल बंद होनी चाहिए। इसी तरह ओ0एस0एच0 कोड 2020 के तहत अंतर्जातीय प्रवासीय मजदूरों को प्रत्येक वर्ष अपने मूल निवास जाने और आने के लिये न्योक्ता द्वारा भत्ता दिये जाने तथा साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ परीक्षण का प्राविधान है। लेकिन इसका लाभ कितने श्रमिकों को मिल रहा है ये सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि 100 प्रतिशत श्रमिकों को इस कोड का लाभ मिल सके।
सांसद तनुज पुनिया ने कहा कि, ओद्यौगिक सम्बन्ध कोड 2020 के तहत श्रमिक की नौकरी छूटने पर उसे अटल बीमित व्यक्त कल्याण योजना के तहत आर्थिक मदत दी जाती है वो कितनी है। और नौकरी छूटने पर श्रमिक को रिस्किलिंग के लिये 15 दिन की सैलरी दी जाती है जिससे वो नया कौशल सीख सके। ये एक विचारणीय प्रश्न है कि, ऐसा कौन सा कौशल है जो 15 दिन में सीखा जा सकता है जिससे श्रमिक को जीवन यापन के लिये सम्मान जनक रोजगार मिल सके। इसी तरह मजदूरों के मुकदमों में ट्रिब्यूनल में एक साल में न्याय मिलने का प्राविधान है, लेकिन, सालों साल से श्रमिकों के मुकदमें लम्बित हैं जिसकी जांच कराकर उन्हें न्याय दिलाने की जरूरत है। श्रमिकों को उनका हक मिले और उनकी परेशानियां दूर हो इसके लिये समय समय पर उनके लिये बनाये गये कानूनों एवं कोर्ट की समीक्षा करके उसमें बदलाव की आवश्यकता है।
बैठक में कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रामानुज यादव ने कहा कि, श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों की बेटियों की शादी में जो आर्थिक सहायता मिलती है वो शादी के बाद मिलती है। जिसे शादी से पूर्व मिलनी चाहिए और उसमें से बिचौलियों का किनारा किया जाना चाहिए। और 60 वर्ष से उपर के मजदूरों को निश्चित रूप से पेंशन का लाभ मिल सके ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इंटक नेता पण्डित श्रीकांत मिश्रा ने मजदूरों में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किये जाने पर बल दिया तथा बैठक में प्रमुख उद्यमी प्रदीप जैन तथा रबिनन खजांची, बिनोद गाबा, राजेश गुप्ता, अंकुर जैन, मोहम्मद अब्बास, सहित अनेकों श्रम एवं उद्योग बंधुओं ने अपने विचार से अवगत कराया। बैठक में उद्योग व्यापार मण्डल के नेता प्रदीप जैन द्वारा सांसद तनुज पुनिया को अंग वस्त्र डाल कर सम्मानित किया गया और मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने फूलों के गुलदस्ते से सांसद का स्वागत किया।
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