कारवान-ए-तहजी-ओ-अदब का चौथा मुशायरा
शायरों और कवियों ने खूब लूटी दाद
Barabanki News... जिले के सूरतगंज कस्बे के बेल चौराहे पर छोटी पुलिया के पास शनिवार रात कारवान-ए-तहजीब-ओ-अदब की ओर से जशन-ए-अंजुम बाराबंकवी के नाम से ऑल इंडिया मुशायरे और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मशहूर शायर डॉ नय्यर जलालपुरी की निजामत में हुए मुशायरे में मुल्क के तमाम नामवर शोअरा और कवियों ने अपने कलाम से खूब दाद बटोरी।
कारवान-ए-तहजीब-ओ-अदब के चौथे ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन का आगाज़ वसीम रामपुरी ने नात-ए-पाक से किया। इसके बाद तमाम शायरों ने अपने कलाम पेश किए।
शायर जौहर कानपुरी ने पढ़ा 'वफ़ादारी वतन से हो यही इस्लाम कहता,हम अपने दिल के हर कोने में हिंदुस्तान रखते हैं।
डॉ नैय्यर जलालपुरी ने पढ़ा' मैं दिया हूं मुझे बुझाएगी, ए हवा सास फूल जायगी।
वसीम रामपुरी ने पढ़ा 'मेरे खुदा मेरा भारत महान हो जाए, जमीन हिन्द एक आसमान हो जाए।
कवि प्रियांशु गजेंद्र ने पढ़ा' जैसे तैसे उमर बिता ली मैंने तेरे प्यार में, रात रात भर तुम को गाया सुबह छपे अखबार में।
शायरा गुलेसबा फतेहपुरी ने पढ़ा 'हालात के बिगड़ने का एहसास तब हुआ, जब लोग मेरे घर के खरीददार हो गए।
सूरतगंजवी शायर मुश्ताक कुरैशी ने पढ़ा 'वफ़ा खुलूसो मोहब्बत का भरम कौन रखता है, उम्र भर अपने दिल में किसी का गम कौन रखता है।
शायरा डॉ सरला अस्मा ने पढ़ा 'तमाशा खुद सरे बाजार मत बन, मोहब्बत कर मगर बीमार मत बन
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इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष रिजवान अहमद,उपाध्यक्ष जियाउर्रहमान, खजांची मो.जैद, अब्दुल हफीज, सिराजुद्दीन, इस्लामुद्दीन चुन्ना, इरफान कुरैशी, हाफिज शादाब,इस्लाम फनीचर, अय्यूब, जुबेर, फैजान मलिक, अब्दुल कय्यूम, कल्लू, शेखर पाल, सलीम आदि कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।
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