Barabanki News... देवा कोतवाली के पल्टा गांव में शुक्रवार देर रात हुई आगजनी की घटना में आरोपी पक्ष के दावों ने मामले में नया मोड़ दे दिया है। आरोपी पक्ष का दावा है कि ढाबे पर आने वाले क्षेत्र व शहर के शराबियों के साथ मिलकर ढाबा संचालक ने पहले आरोपी को मारापीटा उसके बाद उसे फंसाने के लिए खुद अपने ढाबे में आग लगवा दी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पुलिस जांच के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।
देवा कोतवाली क्षेत्र के पलटा में हुए ढाबे में आगजनी मामले के आरोपियों का दावा है कि पंडित जी ढाबे में मांस मुर्गा बेचते हैं। जहां देर रात शराबियों व अराजक तत्वों का जमवाड़ा होता है। शहर के कई सफेदपोश व प्रतिष्ठित व्यक्ति ढाबे पर बैठकर नशा करते हैं और मांस खाते हैं। दरअसल आगजनी के मामले में आरोपी जयकरन मिश्रा की मिठाई की दुकान देवा पेट्रोल पम्प के सामने है। आरोपियों का दावा है कि पास में ही विपक्षी दयाशंकर मांस आदि खुलेआम बेचते हैं। उनकी मिठाई की दुकान लगभग 20 बर्षों से है। वहीं विपक्षी दयाशंकर पिछले कुछ वर्षों से अपने ढाबे पर मांस, मुर्गा खुलेआम बेचते हैं। दावा ये भी है कि मांस के अवशेष व खून ढाबा संचालक आरोपी की दुकान की तरफ फेंकते हैं। मना करने पर विपक्षी अपनी पहुंच की धौंस दिखाते हैं। आरोपियों के पक्ष का दावा है कि आरोपी ने शाम के वक्त नल पर मांस, मुर्गा आदि धोने से मना किया, तो विपक्षी उग्र हो गया और गंदी-गंदी गालियां देते हुए जानमाल की धमकी देने लगा। जिस पर आसपास के लोगों ने समझा बुझाकर मामले को शांत करवा दिया और कहा कि आपस का मामला है। दावा है कि इसी मामले की कचीड़ निकालने के लिए ढाबा संचालकों ने शुक्रवार रात करीब 10 बजे विपक्षी दयाशंकर पुत्र राम दुलारे अपने मददगारों व गैंग के सदस्यों, जिसमें रिशु पुत्र दयाशंकर, प्रदीप पुत्र दयाशंकर, आशुतोष पुत्र शिव नारायन, अखिलेश पुत्र अमरनाथ जो काफी दबंग व सरहंग किस्म के पहुंच वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने ने योजना बनाकर बुजुर्ग जयकरन मिश्रा को मारापीटा और अपने बचाव में अपने ढाबे में बैठे शराबियों से आग लगवा दी। ताकि पुलिस गरीब व्यक्ति व उसके पुत्रों को नामजद कर दे।
मामले में पत्रकार को भी दोषी बनाया गया है। वहीं आरोपी पक्ष का दावा है कि उस वक्त उनके परिवार का सदस्य वो पत्रकार साथी के घर में आयोजित प्रीतिभोज में शहर में था। जिसकी वीडियो व फोटो भी है। आरोपी पक्ष का दावा ये भी है कि दयाशंकर मिश्र के पुत्र रिशु मिश्रा ने बताया है कि ढाबे पर डेढ़ लाख रुपए का कर्ज लिया है, जबकि ढाबा सरकारी जमीन पर है। जिस पर लेखपाल प्रिया वर्मा के द्वारा पूर्व में धारा 115सी के तहत कार्रवाई भी की जा चुकी है और जगह खाली करने का भी आदेश दिया गया है। जबकि फूस और छप्पर की दुकान आदि पर राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई हो चुकी हो। ऐसे व्यक्ति को उसकी संपत्ति पर बैंक या सरकार के द्वारा ऋण नहीं दिया जाता। फर्जी तरीके से ऋण लेकर के मोटरसाइकिल चैन और अंगूठी भी बनवाई है। इस तरह आरोपी पक्ष के दावों से मामले में नया मोड़ आ गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। जांच के बाद साफ होगा कि दोषी कौन है।
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