Barabanki News... सूफी संत हज़रत मखदूम शेख मेले के मौके पर आयोजित 10 दिवसीय मेला मे आल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया। मुशायरा की सदारत शायर शोएब अनवर ने की जबकि निज़ामत वासिफ फारूकी ने की। देर रात तक चले मुशायरे में शायरों की गजलें व नज्में सुनकर श्रोताओं ने काफी लुत्फ उठाया। ज्ञात हो गुरुवार को मेला मैदान में आयोजित ऑल इण्डिया मुशायरा का आगाज डॉ नदीम शाद ने नाते कलाम के साथ शुरू किया। इसके बाद जहूर फैजी बाराबंकवी ने पढ़ा सोचता हूं.. कि सारे सितम तोड़ दूं, घुट के जीने से बेहतर है दम तोड़ दूं..
डॉ ओम शर्मा ओम ने पढ़ा कैसे खुद को वो ढाल लेते हैं, जिस्म जां निकाल लेते हैं, बूढ़े मां बाप को घर से भगाकर के लोग कुत्तों को पाल लेते हैं।
फैज खुमार बाराबंकवी- तो फैज नसब पर मुझे गुरुर भी है..खुमार भी है रगों मे मेरे सुरूर भी है।
हास्य शायर सुंदर मालेगांव- गंजा हूं काला हूं मैं.. मां तो कहती है घर का उजाला हूं..
सायरा सबा बलरामपुरी- उनका खरीददार देखकर.. डर लग रहा है मुझे मिस्र का बाजार देखकर।
मिस्र से तशरीफ लाई प्रोफेसर वला जमाल ने पढ़ा करार छीना है जिसने उसे करार नही.. शिकस्त उसको हुई ये मेरी हार नही..
डॉ नदीम शाद- हर खित्ते पर रहने मे आसानी हो.. पानी बन जा बहने में तुझे आसानी हो..
खुर्शीद हैदर- हिज़्र मे तेरे भटकता रहा सेहरा सेहरा.. इस सफर मे कहीं आराम किया हो तो बता..
अज्म शाकरी- फ़कत तुम्ही को नहीं इश्क़ मे दरबदरी.. तुम्हारी चाह मे गर्दों गुबार हम भी हैं..
जौहर कानपुरी- धूप को आजमा रहा हूं मै.. मोम का घर बना रहा हूं मै.. उसको लेकर गया था कांधे पर, खुद को दफना के आ रहा हूं मै..
शबीना अदीब- तुझे आरज़ू थी जिसकी वही प्यार ला रही हूं.. मेरे गम मे रोने वाले तेरे पास आ रही हूं..
मुशायरे के अन्तिम दौर में कन्वीनर मुशायरा चौधरी वकार अहमद ने आये हुए मेहमानों व श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। वही मुशायरा के आगाज से पहले क्षेत्रीय पत्रकारों के सम्मान समारोह में क्षेत्र के सभी पत्रकारों को अंगवस्त्र व डायरी देकर उन्हें सम्मानित किया गया। इस मौके पर एसडीएम राजेश विश्वकर्मा, कोतवाल डीके सिंह, पूर्व चैयरमेन मो0 मशकूर, सांझी विरासत परवेज अहमद, सपा प्रवक्ता फराजुद्दीन किदवई, नसीम गुड्डू, मो0 रिजवान खान सहित बड़ी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।
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