डॉक्टर (हकीम) एएच उस्मानी, बाराबंकी
आज हम बेहद महत्वपूर्ण विषय पर बात करने जा रहे हैं, वो है "बुजुर्गों में मेंटल कन्फ्यूजन और चिड़चिड़ापन के बारे में। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हमारे बुजुर्ग माता-पिता या दादा-दादी अक्सर मानसिक तनाव, भ्रम, और चिड़चिड़ेपन का सामना करते हैं। यह न केवल उनकी, बल्कि परिवार की भी चिंता का विषय बन जाता है। तो आइए, जानते हैं कि इसके पीछे के कारण क्या हैं और हम इसे कैसे दूर कर सकते हैं।
कारण
60 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों मे प्यास महसूस करने की छमता कम हो जाती है जिस से बुजुर्ग पानी पीना कम कर देते हैं, अगर घर का कोई सदस्य उनको पानी या तरल पेय पीने को ना कहे, तो वह जल्द ही पानी की कमी का शिकार हो जाते हैं। जिस्म में पानी की कमी होना खतरनाक है। इससे पूरा जिस्म प्रभावित होता है। पानी की कमी से दिमागी उलझन,लो ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन बढ़ जाती है,चिड़चिड़ापन,कमज़ोरी, बदन मे सनसनाहट और एलजाइमर हो सकता है और कभी कभी मरीज कोमा मे भी चला जाता है। इसके अलावा निम्न कारण हो सकते हैं...
शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएँ:
डिमेंशिया (Dementia): यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने की क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति कमजोर हो जाती है।
अल्जाइमर (Alzheimer's): यह एक प्रकार का डिमेंशिया है, जो धीरे-धीरे दिमागी कार्यों को कमजोर कर देता है।
थायरॉइड की समस्या: हॉर्मोनल असंतुलन भी बुजुर्गों में मानसिक तनाव और भ्रम का कारण बन सकता है।
शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव: ब्लड शुगर का कम या ज्यादा होना भी मेंटल कन्फ्यूजन का कारण हो सकता है।
मनोवैज्ञानिक कारण:
अकेलापन और सामाजिक अलगाव:
बुजुर्गों को अकेलापन महसूस होता है, खासकर जब परिवार के सदस्य उनसे दूर रहते हैं।
डिप्रेशन और चिंता: लंबे समय तक डिप्रेशन में रहना बुजुर्गों में चिड़चिड़ापन बढ़ा सकता है।
पुरानी यादों का दर्द: पुराने समय की घटनाएं और उनके नकारात्मक अनुभवों की यादें उन्हें परेशान कर सकती हैं।
दवाइयों के दुष्प्रभाव:
बुजुर्ग अक्सर कई प्रकार की दवाइयाँ लेते हैं, जिनके साइड इफेक्ट्स में मानसिक भ्रम और चिड़चिड़ापन भी शामिल हो सकते हैं।
नींद की कमी:
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अनिद्रा (Insomnia) या रात में बार-बार जागना भी मानसिक अस्थिरता का कारण हो सकता है।
उपाय-
पानी (तरल पदार्थ)जरूर पियें और पिलाएं:
पानी पीना भूलने की आदत 60 साल की उम्र मे शुरु होती है। हमारे जिस्म में पानी की मात्रा पुरूषों में 60%,महिलाओं में 55% तक होना चाहिए। उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है। वैसे वैसे प्यास कम होती जाती हैऔर शरीर मे पानी कम हो जाता है।
पानी या तरल पेय (पानी,जूस,चाय,दूध,नारियल पानी,सूप,रस)पीने की आदत डालें। साथ ही वह फल जिसमें पानी की मात्रा अधिक होती है जैसे तरबूज,खरबूजा,लीची,अनन्नास, सन्तरा, मौसमी, का इस्तेमाल किया करें।
हर 2 घंटे बाद कोई तरल पदार्थ जरूर पियें
बुजुर्ग लोगों को एक दुशवारी यह होती है कि अगर पानी ज्यादा पीते हैं तो पेशाब ज्यादा होता है तो यह किया जाए कि दिन में जयादा पानी पिया जाए। रात में कम पिया जाए ताकि रात मे बार बार पेशाब के लिए उठना ना पड़े।
घर के सदस्यों को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि अगर घर के बुजुर्ग को चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। बार-बार गुस्सा आ रहा है तो तरल पदार्थों की पिलाना चाहिए।
शरीर के वजन का लगभग 4 गुना पानी हर व्यक्ति को रोज़ पीना चाहिए। इसके अलावा निम्न उपाय भी बुजुर्गों के उपरोक्त समस्याओं से निजात दिला सकते हैं।
स्वस्थ आहार और पोषण:
ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार, जैसे मछली, नट्स और बीज, दिमागी स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।
हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, और साबुत अनाज से भरपूर आहार उनकी मानसिक स्थिति को सुधार सकता है।
नियमित व्यायाम:
योग और मेडिटेशन: योगासन और ध्यान बुजुर्गों को मानसिक शांति प्रदान कर सकते हैं।
हल्की फिजिकल एक्टिविटी जैसे वॉकिंग और स्ट्रेचिंग से न केवल उनका मूड बेहतर होता है, बल्कि नींद भी अच्छी आती है।
सामाजिक जुड़ाव:
उन्हें परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करें। सोशल इंटरेक्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
बुजुर्गों के लिए कम्युनिटी क्लब्स या सीनियर सिटीजन्स ग्रुप्स में शामिल होना फायदेमंद हो सकता है।
मानसिक उत्तेजना (Mental Stimulation):
ब्रेन गेम्स, पज़ल्स और क्रॉसवर्ड्स जैसे मानसिक खेल उनके दिमाग को सक्रिय रख सकते हैं।
किताबें पढ़ना और म्यूजिक सुनना भी उनका मूड बेहतर बना सकता है।
नियमित स्वास्थ्य जांच:
नियमित रूप से डॉक्टर से परामर्श लें, खासकर अगर कोई दिमागी समस्या है तो।
दवाइयों की समीक्षा करें ताकि उनके साइड इफेक्ट्स का पता चल सके।
परिवार का सहयोग:
बुजुर्गों के साथ धैर्यपूर्वक बात करें। उन्हें महसूस कराएं कि वे अकेले नहीं हैं।
उनकी भावनाओं को समझें और उनका समर्थन करें।
बुजुर्गों में मेंटल कन्फ्यूजन और चिड़चिड़ापन एक गंभीर समस्या हो सकती है, लेकिन सही देखभाल, प्यार और सपोर्ट से इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। हमें यह समझना होगा कि बुजुर्ग हमारी जिम्मेदारी हैं और उनके जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें हमारी सबसे ज्यादा जरूरत है।
आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने परिवार के बुजुर्ग सदस्यों का ध्यान रखेंगे और उन्हें एक खुशहाल और स्वस्थ जीवन जीने में मदद करेंगे।
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