लालकृष्ण आडवाणी का नाम भारतीय राजनीति में एक ऐसा नाम है, जिसे न केवल भाजपा के एक संस्थापक सदस्य के रूप में जाना जाता है, बल्कि अयोध्या आंदोलन के प्रणेता के रूप में भी पहचाना जाता है। भारतीय राजनीति में उनके योगदान ने देश की राजनीति की दिशा को बदल दिया, विशेष रूप से 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान। इस आंदोलन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक सफर
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवम्बर 1927 को कराची (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया और उन्होंने भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ने का निर्णय लिया। आरएसएस के साथ उनका जुड़ाव भारतीय राजनीति में उनके प्रवेश का पहला कदम था। आडवाणी की संगठनात्मक क्षमताओं और वैचारिक प्रतिबद्धता ने उन्हें जल्द ही भारतीय जनसंघ (जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी के रूप में विकसित हुआ) में एक प्रमुख स्थान दिलाया।
भाजपा का गठन और आडवाणी की भूमिका
1977 में जनता पार्टी के गठन के बाद आडवाणी ने अपनी राजनीतिक यात्रा को एक नई दिशा दी। हालांकि, जनता पार्टी के भीतर 'दोहरी सदस्यता' के मुद्दे पर विवाद के कारण भारतीय जनसंघ के सदस्यों ने पार्टी छोड़ दी और 1980 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गठन किया। भाजपा के शुरुआती दिनों में आडवाणी का योगदान अविस्मरणीय रहा। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर पार्टी को संगठित किया और उसे एक सशक्त राजनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया।
आडवाणी को 1986 में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने "गांधीवादी समाजवाद" को अपनी विचारधारा के रूप में अपनाया, लेकिन इसे जनता का समर्थन नहीं मिल सका। इसके बाद, आडवाणी ने हिंदुत्व के एजेंडे को भाजपा की राजनीति के केंद्र में लाने का निर्णय लिया, जिसने पार्टी को एक नई पहचान दी।
अयोध्या आंदोलन की पृष्ठभूमि
अयोध्या में बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि विवाद भारतीय राजनीति का एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। इस विवाद का मूल आधार यह था कि बाबरी मस्जिद को 16वीं सदी में मुगल सम्राट बाबर के जनरल मीर बाकी ने एक ऐसे स्थल पर बनवाया था, जो हिंदुओं के अनुसार भगवान राम का जन्मस्थान था। हिंदू संगठनों का दावा था कि मस्जिद से पहले वहां एक प्राचीन राम मंदिर था, जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।
1970 और 1980 के दशक में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और अन्य हिंदू संगठनों ने इस मुद्दे को उठाना शुरू किया, लेकिन यह लालकृष्ण आडवाणी थे जिन्होंने इस आंदोलन को राजनीतिक मंच पर लाने का कार्य किया।
राम रथ यात्रा: आंदोलन का शंखनाद
अयोध्या आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए आडवाणी ने 1990 में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने "राम रथ यात्रा" का आयोजन किया, जो 25 सितम्बर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से शुरू हुई और अयोध्या में समाप्त होनी थी। इस यात्रा का उद्देश्य राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए जन समर्थन जुटाना था।
राम रथ यात्रा एक विशेष रूप से डिजाइन किए गए "रथ" (वास्तव में एक संशोधित वाहन) पर निकाली गई, जिसमें आडवाणी ने पूरे देश में घूम-घूमकर जनसभाओं को संबोधित किया। उनकी इस यात्रा ने भाजपा को एक नई पहचान दी और उसे एक मजबूत हिंदू समर्थक पार्टी के रूप में स्थापित किया। यात्रा के दौरान आडवाणी ने "जय श्री राम" के नारों के साथ लोगों को राम मंदिर के प्रति जागरूक किया और समर्थन मांगा।
हालांकि, आडवाणी की यह यात्रा अयोध्या तक नहीं पहुंच पाई क्योंकि बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उन्हें 23 अक्टूबर 1990 को समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इस यात्रा ने जो लहर पैदा की, उसने भारतीय राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया।
बाबरी मस्जिद विध्वंस और उसके परिणाम
राम रथ यात्रा के बाद अयोध्या आंदोलन की लहर तेज हो गई और देशभर में राम मंदिर के समर्थन में जनसमूह एकत्रित होने लगे। 6 दिसम्बर 1992 को भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और शिवसेना के कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया। इस घटना ने पूरे देश में साम्प्रदायिक तनाव और दंगों को जन्म दिया।
आडवाणी को इस आंदोलन का मुख्य चेहरा माना गया और उन पर बाबरी मस्जिद विध्वंस का आरोप भी लगाया गया। हालांकि, उन्होंने हमेशा इस बात से इनकार किया कि उनका इरादा मस्जिद गिराने का था। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य केवल राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए जन समर्थन जुटाना था।
आडवाणी की राजनीतिक उन्नति
अयोध्या आंदोलन ने लालकृष्ण आडवाणी को भारतीय राजनीति का एक प्रमुख नेता बना दिया। इस आंदोलन ने भाजपा को लोकसभा में अपनी सीटें बढ़ाने में मदद की। 1984 के चुनावों में भाजपा ने मात्र 2 सीटें जीती थीं, लेकिन 1991 के चुनावों में पार्टी ने 120 से अधिक सीटें जीतीं। यह आडवाणी की नेतृत्व क्षमता और हिंदुत्व के एजेंडे का प्रभाव था जिसने भाजपा को कांग्रेस के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बना दिया।
1996 में, भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और आडवाणी की पार्टी ने 13 दिनों के लिए सरकार बनाई। इसके बाद 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार बनाई, जिसमें आडवाणी ने गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर जोर दिया।
आडवाणी का विवादित बयान और प्रभाव
हालांकि, आडवाणी के राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव आए। 2005 में, पाकिस्तान यात्रा के दौरान उन्होंने जिन्ना को "धर्मनिरपेक्ष" कहकर विवाद खड़ा कर दिया। इससे पार्टी में उनकी स्थिति कमजोर हो गई और उन्हें भाजपा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा।
इसके बावजूद, आडवाणी ने हार नहीं मानी और 2009 के आम चुनावों में उन्होंने पार्टी का नेतृत्व किया, हालांकि भाजपा को उस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा।
राजनीति में आडवाणी की विरासत
लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीय राजनीति को एक नया मोड़ दिया और हिंदुत्व की विचारधारा को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया। उन्होंने भाजपा को एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया, जो आज भारतीय राजनीति का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।
उनके द्वारा शुरू किए गए अयोध्या आंदोलन ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त राजनीतिक दल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भी, भाजपा की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा राम मंदिर और हिंदुत्व के एजेंडे पर आधारित है, जिसे आडवाणी ने शुरू किया था।
आडवाणी का निजी जीवन और उनके आदर्श
आडवाणी एक सरल और अनुशासित जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्नी कमला आडवाणी का निधन 2016 में हुआ था। उनके दो बच्चे हैं – एक बेटा जयंत और एक बेटी प्रतिभा। आडवाणी को भारतीय संस्कृति, इतिहास और धार्मिक ग्रंथों का गहन ज्ञान है।
उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को "मेरा देश, मेरा जीवन" नामक आत्मकथा में संजोया है, जिसमें उन्होंने अपने राजनीतिक सफर, विचारधारा और जीवन के विभिन्न पहलुओं को साझा किया है।
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लालकृष्ण आडवाणी का नाम भारतीय राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में हमेशा याद किया जाएगा, जिन्होंने न केवल भाजपा को एक सशक्त राजनीतिक दल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी। अयोध्या आंदोलन के प्रणेता के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें एक ऐसा नेता बना दिया जिसने भारतीय राजनीति के परिदृश्य को बदल दिया।
आडवाणी का योगदान आज भी भाजपा और भारतीय राजनीति में गूंजता है। उन्होंने जो बीज बोए थे, वह आज एक वटवृक्ष का रूप ले चुके हैं, जहां भाजपा भारतीय राजनीति की प्रमुख शक्ति बन चुकी है। उनके योगदान को न केवल भाजपा कार्यकर्ता, बल्कि पूरे देश के लोग हमेशा याद रखेंगे।
लालकृष्ण आडवाणी के जीवन और उनकी राजनीति ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ निश्चय, अनुशासन और संगठनात्मक क्षमताओं के बल पर कोई भी व्यक्ति इतिहास की दिशा बदल सकता है। अयोध्या आंदोलन और राम रथ यात्रा के जरिए उन्होंने जो लहर पैदा की, वह भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुका है।
Aaj Ki shakhsiyat
Lal Krishna Advani
Founder
Ayodhya Movement
Bjp
Home minister
vice prime minister


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