शेख अब्दुल कादिर जीलानी फाउण्डेशन के तहत जलसा हुआ
Lucknow... सूफियाऐ क्राम और बुजुरगाने दीन खास कर ग़ौस आज़म शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रह॰ की शिक्षा को फैलाने के लिए समर्पित शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी फाउण्डेशन शिव नगर, रूप पुर, खदरा के अन्र्तगत ’’यौमे ग़ौसे आजम‘‘ मनाया गया। इस अवसर पर उलामा व मशाएख़ के प्रसिद्ध परिवार फरंगी महल के विख्यात अ़ालिम हज़रत मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली इमाम ईदगाह लखनऊ ने ह़जरत ग़ौसे पाक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महबूब-ए-सुबहानी हज़रत शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रह॰ जैसे सूफी और आलिम की महानता को सारी दुनिया मानती है। खुदा ने अपने इस चहीते बन्दे को बहुत अधिक विशेषतायें दे रखी थी। आप जन्म से ‘‘वली’’ (बुजुर्ग) थे। आप उच्च मानव व्यवहार का सम्पूर्ण उदाहरण थे। मौलाना ने कहा कि शेख़ अब्दुल कादिर जीलानी ने जो मानवता की शिक्षा दी उसी शिक्षा पर चल करके अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त हो सकती है और अल्लाह के गुस्से से बचा जा सकता है।
मौलाना ने कहा कि हज़रत ग़ौसे पाक ने बहुत सी किताबें लिखीं हैं। जिन मेें से ‘‘गुनिययतुत त़ालिबीन’’, ‘‘फुतूहुल गैब’’ और ‘‘अलफतहुर्रब्बानी’’ बहुत प्रसिद्ध र्हुइं। सारी किताबें उन के ज्ञान और दीन में आप की गहरी समझ की साक्षी हैं। आप इबादत इतनी करते थे कि चालीस वर्ष आप ने इ़शा (रात की नमाज) के वुजू से फजर (सुबह की नमाज) की नमाज पढ़ी। पंद्रह साल तक ग़ौसे अ़ाजम का यह मामूल रहा कि इशा के बाद पूरा कुरान शरीफ खत्म फरमाते। पच्चीस वर्ष रेगिस्तान में इस तरह गुज़ारे की इन्सान कि शक्ल तक न देखी।
मौलाना फरंगी महली ने कहा कि हज़रत ग़ौसे अ़ाजम को इस तरह श्रद्धांजलि पेश की जा सकती है कि हम सब उन के बताये हुए मार्ग पर चलें। जिस तरह महबूबे सुबहानी ने अपनी मुबारक जिंदगी की हर घड़ी रसूल स॰ की सुन्नतों और इस्लामी शरीअत के प्रचार एवं प्रसार के लिए समर्पित कर दी थी हम भी अपनी जिन्दगियों को रसूल स॰ की सुन्नतों और इस्लामी शरीअत के अनुसार ढालें।
जलसे में फाउण्डेशन के अध्यक्ष हाजी खालिद जीलानी ने ह़ाज़िरीन का स्वागत किया फाउण्डेशन के महासचिव माजिद जीलानी ने हाजिरीन का शुक्रिया अदा किया।
मौलाना खालिद रशीद की दुआ पर जलसे का समापन हुआ।
Lucknow
Gyahrwin Shrif
Shiekh Abdul Qadir Jeelani
Ghaus-e-Azam


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