जेपी के समाजवाद का नारा आज भी गूंज रहा-आरके चौधरी
गांधी भवन में मनाई गई जय प्रकाश नारायण जयंती
BARABANKI NEWS...शुक्रवार को देवा रोड स्थित गांधी भवन में लोक नायक जय प्रकाश नारायण की जयंती मनाई गयी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मोहनलालगंज के सपा सांसद आरके चौधरी रहे। श्री चौधरी ने सर्व प्रथम महात्मा गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर जयप्रकाष नारायण के चित्र पर माल्यापर्ण व पुष्प भेंट कर श्रद्धासुमन अर्पित किये।
इस मौके पर गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने सपा सांसद आर.के. चौधरी को सामाजिक सहभागिता सम्मान से सम्मानित किया। इस मौके पर श्री चौधरी ने कहा कि जय प्रकाश नारायण का नाम लेते ही देश की आजादी में 1942 की अगस्त क्रांति में आजादी की लड़ाई से लेकर वर्ष 1977 तक तमाम आंदोलनों की मशाल थामने वाले के ऐसे शख्स के रुप में उभरता है। जिन्होंने अपने विचारों, दर्शन तथा व्यक्तित्व से देश की दिशा तय की थी। श्री चौधरी ने आगे कहा कि लोक नायक जेपी यानि जय प्रकाश नारायण उनका नाम लेते ही एक साथ उनके बारे में लोगों के मन में कई छवियां उभरती हैं। लोकनायक के शब्द को असलियत में चरितार्थ करने वाले जय प्रकाश नारायण अत्यंत समर्पित जननायक और मानवतावादी चिंतक तो थे ही इसके साथ-साथ उनकी छवि अत्यंत शालीन और मर्यादित सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति की थी। उनका समाजवाद का नारा आज भी हर तरफ गूंज रहा है।
वहीं समाजवादी वांदी चिंतक राजनाथ शर्मा ने कहा कि जय प्रकाष का जन्म 11 अक्टूबर 1902 में सिताबदियारा बिहार में हुआ था। इनके पिता श्री देवकी बाबू और माता का नाम फूलरानी देवी था। बचपन में उन्हे 4 वर्ष तक दांत नही आने की वजह से उनकी माताजी उन्हे बऊल जी कहती थी। उन्होने जब बोलना शुरु किया तो वाणी में ओज झलकने लगा। वर्ष 1920 में जय प्रकाष का विवाह बिहार के मषहूर गांधीवादी बृज किशोर प्रसाद की पुत्र प्रभावती के साथ हुआ। प्रभावती विवाह के बाद कस्तूरबा गांधी के साथ गांधी आश्रम में रही। जय प्रकाष ने रॉलेट एक्ट जलियावाला बाग नरसंहार के विरोध में ब्रिटिष शैली के स्कूलों को छोड़कर बिहार विद्यापीठ से अपनी उच्च षिक्षा पूरी की। जिसे प्रतिभाशाली युवाओं को प्रेरित करने के लिए डॉ राजेन्द्र प्रसाद और सुप्रसिद्ध गांधीवादी डा. अनुग्रह नारायण सिन्हा ने स्थापित किया था।
इस मौके पूर्व विधायक सरवर अली खां ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में जय प्रकाश नारायण के योगदानों के बारे जितना कहा जाए वह कम है। वल विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। वर्ष 1929 में वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये। बाद में जब कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन हुआ तो उन्हे उसमें शामिल कर लिया गया और उन्हे पार्टी का महासचिव बनाया गया। बाद के दिनों में कई बार वह जेल भी गये और लाठियां भी खाई। गांधी जी के ‘करो या मरो‘ के नारे को उन्होंने हमेशा याद रखा। इन्ही लोगों के अथक प्रयास के बाद 15 अगस्त 1947 को हम आजाद हो गये।
इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता हुमायूं नईम खां, विनय कुमार सिंह, मृत्युंजय शर्मा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य उमेश रावत, पूर्व प्रधान ज्ञान सिंह यादव, अशोक जायसवाल, मनीष सिंह, राजेश यादव, रंजय शर्मा, नीरज दूबे, तौफीक अहमद, अतुल कुमार, पवन कुमार रावत, सत्येन्द्र कुमार आदि मौजूद रहे। वहीं पूर्व जिला पंचायत सदस्य उमेश रावत ने आये अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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