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UP News: कश्मीर के सफर को याद कर अखिलेश ने कैसे साधा बीजेपी पर निशाना?

 

Lucknow News... समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा को पता नहीं किस बात का घमंड रहता है। जब तक ऊंट पहाड़ के नीचे नहीं आता है तब तक उसे भी अपनी ऊंचाई का घमण्ड रहता है। श्रीनगर कश्मीर में इतने ऊंचे-ऊंचे पहाड़ है लेकिन मानव जरा सी ऊंचाई पर पहुंचता है तो घमण्ड में चूर हो जाता है। जम्मू कश्मीर यात्रा के दौरान इस वार्ता क्रम में अखिलेश यादव के साथ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी भी थे। 

 केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में चुनाव के बाद नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष श्री उमर अब्दुल्ला को 16 अक्टूबर 2024 को जब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई तब इंडिया गठबंधन के सभी प्रमुख नेता उन क्षणों के साक्षी बने। इनमें भी उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सभी के विशेष आकर्षण के केन्द्र रहे। जैसे ही शपथ ग्रहण स्थल श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर हाल में अखिलेश जी पहुंचे नवनिर्वाचित विधायकों सहित सभी ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। 

अखिलेश यादव 15 अक्टूबर 2024 की शाम ही श्रीनगर पहुंच गए थे। उनके आगमन की खबर आग की तरह फैलते ही उनका हर रास्ते पर, जहां से वे गुजरे, स्थानीय वाशिंदे उनका अभिवादन करते दिखाई दिए। दो दिन वे अखिलेश जी से मिलने के लिए कतार लगाए रहे। नौजवान तो बड़ी संख्या में उनके स्वागत में घंटों खड़े रहे। कश्मीर के नेताओं, विधायकों सहित आम जन सभी के चेहरों पर अखिलेश जी को देखने भर से उनकी आंखों में जो चमक थी उसमें भारत के भविष्य का नेतृत्व झलकता था। अखिलेश यादव की डल झील के किनारे रूकने की व्यवस्था थी। देर रात तक और अगले दिन सुबह तक कश्मीर के नौजवानों का समूह उनके दीदार के लिए डटा रहा। कश्मीर में नौजवानों की बेरोजगारी चरम पर है। यहां के नौजवान रोटी-रोजगार के लिए देश भर में घूमते रहते है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी सरकार के समय अखिलेश यादव जी ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में शानदार गोमती रिवरफ्रंट का निर्माण कराया था। यहां सड़क के किनारे कश्मीरी युवक ड्राईफ्रूट बेचते मिल जाएंगे। वैसे आज कल भाजपा सरकार में उन्हें बार-बार अपमानित होना पड़ता है। उनके ड्राईफ्रूट सड़क पर बिखेर दिए जाते हैं और उनसे अभद्रता की जाती है।
कश्मीरियों ने जिस गर्मजोशी से अखिलेश जी का स्वागत अभिनंदन किया वाकई वह बहुत स्मरणीय है। नौजवानों ने ‘अखिलेश यादव साहब आगे बढ़ो,‘ ‘अखिलेश साहब कदम आगे बढ़ाओ, यह देश तुम्हारा है।‘ नारे लगा रहे थे। ऐसा लगता था जैसे नौजवानों ने कश्मीर का भविष्य भी अखिलेश यादव जी के साथ जोड़ रखा है। उन्हें उम्मीद है कि उनके मसलों का समाधान यही ‘युवाहृदय सम्राट‘ करेगा। अखिलेश यादव ने जब बताया कि उन्होंने अपने सैफई गांव में भी कश्मीर के चिनार के पेड़ लगाए थे, जो आज भी लहलहा रहे है, तो खुद फारूख अब्दुल्ला साहब को बहुत ताज्जुब हुआ। 

अखिलेश यादव गाँदरबल लेह हजरत बल मस्जिद के रास्ते से हरिपर्वत किला देखने भी पहुंचे जो कभी कश्मीर की राजधानी रहा था। डोगरा शासन का भी यह किला गवाह बना हुआ है। हरि पर्वत श्रीनगर में डल झील के पश्चिम में है। कहते है यहां किले का निर्माण तो 18वीं शताब्दी में एक अफगान गवर्नर ने कराया था, यह दुर्गम किला निर्जन स्थान पर है और इसके रास्ते में 400 से ज्यादा सीढ़ियां हैं जिन्हें पार करके ही किले के अन्दर जा सकते है। कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है। फारसी में मुगल बादशाह जहांगीर का यह कथन बहुत चर्चित है-‘‘गर फिरदौस बर रुए जमीं अस्त। हमीं अस्त, हमीं अस्त, हमीं अस्त।‘‘ यानी ‘‘इस पृथ्वी पर यदि कहीं स्वर्ग है तो यही हैं, यहीं है, यहीं है।‘‘ कश्मीर सदियों तक संस्कृति, दर्शन के साथ सूफी संतों के लिए भी प्रसिद्ध रहा है।

अखिलेश यादव ने श्रीनगर यात्रा में गहरी छाप छोड़ी है। उनकी इस यात्रा से वहां समाजवादी साथियों में भी नए उत्साह का संचार हुआ है। नौजवान और आम लोगों ने अखिलेश जी में जो रूचि ली है उससे उम्मीद बंधती है कि जम्मू कश्मीर में समाजवादी पार्टी वैचारिक राजनीति की मजबूत दावेदार बनेगी।

(लेखकः राजेन्द्र चौधरी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व कैबिनेट मंत्री हैं)

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