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देवा मेला मुशायरा: अदब और तहज़ीब का वार्षिक उत्सव

 

BARABANKI NEWS... राजधानी लखनऊ से कुछ ही किमी दूर स्थित देवा में सालाना मेले के दौरान होने वाले मुशाएरे ने अपने आयोजन के 100 साल पूरे कर लिए हैं। 100 सालों से देवा मेले का मुशाएरा लगातार होता आ रहा है। गूरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार की अध्यक्षता में देवा मेला एवं प्रदर्शनी समिति के सदस्यों की उपस्थिति में देवा मेला मुशायरे के 100 वर्ष पूरे होने पर मुशायरे की पत्रिका आशार के कवर पेज का प्रमोशन किया गया। इस मौके पर मेला कमेटी के सचिव एवं एडीएम श्री अरुण कुमार सिंह, सहित सदस्यगण सर्वश्री राय स्वरेश्वर बली, फव्वाद किदवई, इकबाल मुबशिर किदवई, संदीप सिन्हा, चौ0 अशीरुद्दीन अशरफ, सहित सुपर वाइजर इक़्तेदार अहमद शक्कू एवं कार्यालय देवा सहायक शमीम अहमद वारसी आदि उपस्थित रहे। आइये आपको बताते हैं इस मेले के एतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में। 
भारत की विविधता और सांस्कृतिक धरोहरें हर वर्ष अनगिनत त्योहारों और मेलों के रूप में जीवंत होती हैं। इनमें से एक प्रमुख आयोजन है देवा मेला, जो उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित देवा शरीफ दरगाह के आस-पास आयोजित होता है। यह मेला धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम है। इस मेले की खासियत है देवा मेला मुशायरा, जो उर्दू शायरी और अदब की खूबसूरत शाम होती है। यह मुशायरा हर साल लाखों शायरी प्रेमियों को आकर्षित करता है और गंगा-जमुनी तहज़ीब की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करता है। 

देवा मेला और उसकी सांस्कृतिक धरोहर 
देवा मेला, हजरत वारिस अली शाह की दरगाह पर आयोजित होता है, जो सूफी संत और समाज सुधारक थे। यह मेला सूफी परंपराओं और धार्मिक एकता को प्रकट करता है। मेले का आयोजन हर साल हजरत वारिस अली शाह के उर्स के मौके पर होता है, जहाँ लाखों की संख्या में लोग विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने आते हैं। इस मेले में न केवल धार्मिक श्रद्धालु आते हैं, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति प्रेमी भी बड़ी संख्या में शिरकत करते हैं। 1111 देवा मेला न केवल धार्मिक महत्ता का प्रतीक है, बल्कि इसे सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मेले के अंतर्गत होने वाला मुशायरा एक प्रमुख आकर्षण है, जहाँ देश के मशहूर शायर और कवि अपने बेहतरीन कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हैं। 

मुशायरे की परंपरा 
उर्दू साहित्य और शायरी में मुशायरे का एक विशेष स्थान है। मुशायरा न केवल शायरों का मंच होता है, बल्कि यह अदब और तहज़ीब का प्रतीक भी है। देवा मेला मुशायरा इस परंपरा को जीवित रखते हुए हर साल शायरी के माध्यम से अदब और तहज़ीब को आगे बढ़ाने का काम करता है। इस मुशायरे में भाग लेने वाले शायर अपनी शायरी के जरिए समाज की विभिन्न भावनाओं, चिंताओं और विचारों को प्रस्तुत करते हैं। उनकी शायरी में प्यार, भाईचारा, इंसानियत और सामाजिक मुद्दों का समावेश होता है। 

गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक 
देवा मेला मुशायरा भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक है। यह मुशायरा हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सौहार्द्र और सांस्कृतिक मेल-जोल का अद्भुत उदाहरण है। देवा शरीफ की धरती पर आयोजित इस मुशायरे में दोनों समुदायों के लोग समान रूप से भाग लेते हैं और अदब का सम्मान करते हैं। यहाँ शायरी के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक एकता का संदेश दिया जाता है, जो दर्शकों को प्रभावित करता है और उन्हें शांति, सद्भाव और भाईचारे के महत्व का बोध कराता है। 

इस मुशायरे में उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं के कवि और शायर भाग लेते हैं, जो यह दर्शाता है कि साहित्य और शायरी सीमाओं से परे होती है। यहाँ न केवल शब्दों की सुंदरता का प्रदर्शन होता है, बल्कि इंसानियत और प्रेम का भी संदेश दिया जाता है। यह आयोजन केवल एक साहित्यिक महफिल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है, जहाँ परंपराएँ और संस्कृतियाँ आपस में मिलती हैं। 

देवा मेला मुशायरे की प्रमुख विशेषताएँ 

उच्च स्तरीय शायरी: देवा मेला मुशायरा उर्दू शायरी के उच्चतम स्तर का प्रतीक है। यहाँ पर देशभर से प्रख्यात शायर आते हैं, जो अपने बेहतरीन कलाम के जरिये श्रोताओं को भावनाओं की गहराइयों में डुबो देते हैं। उनकी शायरी में न केवल सुंदरता होती है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भी संदेश होता है। 

सामाजिक मुद्दों पर जोर: इस मुशायरे में शायर समाज के ज्वलंत मुद्दों को भी अपनी शायरी का हिस्सा बनाते हैं। चाहे वह गरीबों की स्थिति हो, देश में भाईचारे की कमी हो, या महिलाओं के अधिकारों की बात हो—यहाँ हर मुद्दे को गहराई से प्रस्तुत किया जाता है। इस मुशायरे का एक प्रमुख उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।

महिला शायराओं की भागीदारी: देवा मेला मुशायरे में महिला शायराओं की भागीदारी भी बढ़ती जा रही है। उनकी शायरी में न केवल भावनाओं का अद्भुत चित्रण होता है, बल्कि वे समाज में महिलाओं की स्थिति पर भी गहन विचार प्रस्तुत करती हैं। महिला शायराओं की शायरी को श्रोताओं द्वारा विशेष रूप से सराहा जाता है। 

अदब और तहज़ीब का मंच: यह मुशायरा अदब और तहज़ीब का अद्वितीय मंच है, जहाँ हर शायर और श्रोता एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। यहाँ शब्दों का जादू और तहज़ीब की मिठास श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। मुशायरे की गरिमा को बनाए रखने के लिए यहाँ शायरों की विशेष शैली और श्रोता समुदाय का सहयोग होता है। 

मुशायरे का समाज पर प्रभाव 
देवा मेला मुशायरा समाज में अदब और तहज़ीब को प्रोत्साहित करने का काम करता है। यह न केवल शायरी प्रेमियों के लिए एक उत्सव है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत है, जो समाज में शांति और एकता को बढ़ावा देना चाहते हैं। शायर अपनी शायरी के माध्यम से समाज के उन पहलुओं पर रोशनी डालते हैं, जिन पर अक्सर चर्चा नहीं होती। वे अपने शब्दों के माध्यम से श्रोताओं को जागरूक करते हैं और उन्हें समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का बोध कराते हैं।

यह मुशायरा युवाओं को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने का भी काम करता है। यहाँ आने वाले युवा शायर और साहित्यकार वरिष्ठ शायरों से प्रेरणा लेते हैं और अपनी कला को निखारने का प्रयास करते हैं। मुशायरे के माध्यम से उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान मिलता है। 

देवा मेला मुशायरा में हर साल देशभर के प्रसिद्ध शायर शिरकत करते हैं, जो अपने अनूठे अंदाज़ और बेहतरीन शायरी से दर्शकों का दिल जीत लेते हैं। यहां कुछ प्रमुख शायरों के नाम दिए गए हैं, जो इस प्रतिष्ठित मुशायरे में भाग लेते रहे हैं:

1. मंज़र भोपाली मंज़र भोपाली, अपने खूबसूरत अशआर और शानदार अदायगी के लिए जाने जाते हैं। उनकी शायरी में सामाजिक मुद्दों और इंसानियत की झलक मिलती है, जो श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर देती है। 

2. नुसरत मेंहदी नुसरत मेंहदी की शायरी में नारीवादी दृष्टिकोण और इंसानियत का संदेश प्रमुखता से दिखाई देता है। वह अपनी संवेदनशील शायरी और गहरे जज़्बात के लिए प्रसिद्ध हैं। 

3. वसीम बरेलवी वसीम बरेलवी उर्दू शायरी का एक बड़ा नाम हैं। उनकी शायरी में मोहब्बत, समाज और जिंदगी के अनुभवों का अद्भुत चित्रण होता है। वह देवा मेला मुशायरे के नियमित और लोकप्रिय शायरों में से एक हैं। 

 4. नदीम फर्रूख नदीम फर्रूख अपनी सटीक और प्रभावशाली शायरी के लिए जाने जाते हैं। उनकी शायरी में सामाजिक और राजनीतिक चिंतन का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। 

5. राजेश रेड्डी राजेश रेड्डी का नाम उर्दू शायरी की दुनिया में बड़े अदब से लिया जाता है। उनके कलाम में इंसानी रिश्तों, प्रेम, और संघर्ष की गहराई होती है, जो हर दिल को छू जाती है। 

6. शकील आज़मी शकील आज़मी की शायरी युवाओं के दिलों में खास जगह रखती है। उनका अंदाज़ और जज़्बात उर्दू शायरी में नई ताजगी लाते हैं। वह मुशायरे की प्रमुख शख्सियतों में से एक हैं। 

7. परवीन शाकिर परवीन शाकिर की शायरी खासकर नारीवाद और मोहब्बत पर आधारित होती है। उनकी नाज़ुक शायरी और दिल को छू लेने वाले अशआर हमेशा से लोगों के दिलों में जगह बनाते आए हैं। 

8. जावेद अख्तर जावेद अख्तर, मशहूर शायर और गीतकार, अपनी अद्वितीय शैली और गहरे विचारों के लिए जाने जाते हैं। उनकी शायरी में समाज और मानवीय संवेदनाओं का बेहतरीन मिलन होता है। 

 9. बशीर बद्र बशीर बद्र का नाम शायरी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उनकी शायरी में न केवल प्रेम, बल्कि जिंदगी के अनुभवों की भी गहराई होती है। वह देवा मेला मुशायरे के जाने-माने शायरों में से हैं। 

10. अहमद फराज़ अहमद फराज़, अपनी रोमांटिक शायरी और राजनीतिक दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी शायरी मुशायरों में हमेशा खास स्थान पाती रही है। 

इनके अलावा और भी कई जाने-माने शायर देवा मेला मुशायरे में भाग ले चुके हैं। यह मुशायरा उर्दू शायरी की महफिल को सजाने और अदब व तहज़ीब के प्रसार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। 

देवा मेला मुशायरा अदब, तहज़ीब, और शायरी का एक ऐसा वार्षिक उत्सव है, जो श्रोताओं और शायरों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर को सहेजने का कार्य करता है। यह मुशायरा न केवल उर्दू साहित्य प्रेमियों के लिए एक विशेष अवसर है, बल्कि समाज में भाईचारे, शांति, और धार्मिक सौहार्द्र का संदेश भी फैलाता है। इस मुशायरे में साहित्य और संस्कृति का संगम देखने को मिलता है, जो भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण है। 

देवा मेला मुशायरा समाज को शब्दों के माध्यम से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जहाँ हर साल शायरी की इस बेमिसाल महफ़िल में शब्दों की मिठास और तहज़ीब का जादू बिखरता है। यह न केवल एक साहित्यिक आयोजन है, बल्कि समाज में प्रेम, शांति और सद्भाव का एक संदेश भी है, जो हर श्रोता के दिल में गहरी छाप छोड़ जाता है।
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