सुखानदान इंटरनेशनल का कारवान-ए-मुहब्बत मुशायरा
जाने-माने शोअरा ने अपने कलाम से जीत लोगों का दिल
BARABANKI NEWS... महफ़िल-ए-तहज़ीब-ओ-अदब व सुखानदान इंटरनेशनल की ओर से कारवान ए मुहब्बत मुशायरा व कवि सम्मेलन सोमवार को लखपेड़ाबाग स्थित मालिक मैरिज हॉल में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर राम प्रकाश बेखुद ने की और संचालन शाहबाज तालिब ने किया। मुख्य अतिथि के रुप में वरिष्ठ सामाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप उपस्थित रहे।
सुखानदान इंटरनेशनल के एमडी दानिश नदीम ने सभी का स्वागत किया। मुशायरे से पहले सुखानदान इंटरनेशनल के चेयरमैन मशहूर शायर और संचालक नदीम फर्रुख और संयोजक आफाक अली ने सभी अतिथियों और शायरों को सम्मानित किया। इसके बाद मुशायरा और कवि सम्मेलन में शायरों ने बेहतरीन शायरी से श्रोताओं का दिल जीत लिया। इस दौरान शायरों के निम्न शेरों पर खूब दाद दी गई।
हर तरफ़ जाले थे, बिल थे, घोंसले छप्पर में थे
जाने कितने घर मेरे उस एक कच्चे घर में थे
राम प्रकाश बेखुद
गालिब-ओ-मीर, शाहनशाह-ए-सुखन हैं, लेकिन
अपने खित्ते में ज़मीदार-ए-ग़ज़ल हम भी हैं
वासिफ फारूकी
मेरे मसलक के मनाफ़ी हैं, अकीदत के खिलाफ़
मैं न सुन पाऊंगा इक लफ्ज़ मुहब्बत के खिलाफ़
शोएब अनवर
ख़ून आंसू बन गया, आंखों में भर जाने के ब'आद
आप आए तो, मगर तूफ़ां गुज़र जाने के ब'अद
ज़ख़्म जो तुम ने दिया, वो इस लिए रक्खा हरा
ज़िंदगी में क्या बचेगा, ज़ख़्म भर जाने के ब'आद
अज्म शाकिरी
इस तरह बट गया हूं खानों में
जैसे सामान हो दुकानों में
इतनी इज़्ज़त से किस को पूछा गया
हम पुकारे गए आज़ानों में
हाशिम नोमानी
जब भी मरा कहीं भी बड़े घर का आदमी
तो चौक पे लगा दिया पत्थर का आदमी
उस्मान मिनाई
वो हमारा जो दिल चुरा लेंगे
अपनी मुश्किल वो खुद बढ़ा लेंगे
तुमसे मंसूब कर के ग़म अपना
खुद को हम मोअतबह बना लेंगे
फैज़ खुमार बाराबंकवी
चम्पा चमेली और न जूही गुलाब से
सब चाहते हैं खुशबू
तुम्हारे शबाब से
पीता हूं रोज़ शाम को आंखों से तेरा जाम
मतलब नहीं है कोई भी मुझको शराब से
जमील असगर
ज़हन में बस फरहाद रखूंगा
हाल यूं ही बर्बाद रखूंगा
सारे पत्थर मेरे होंगे
तब
अपनी बुनियाद रखूंगा
अभिश्रेष्ठ तिवारी
हमारे हाथों ने ख़ैबर के दर उखाड़े हैं
हमारे हाथों की ताक़त उन्हें कहां मालूम
शहबाज तालिब
खिले हुए रोज़ सी लगती है
कैटरीना के पोज सी लगती है
पत्नी चिकनपॉक्स का टीका
साली बूस्टर डोज सी लगती है
सौरभ जायसवाल
इसी के अलावा मुंबई से आई कवित्री शांभवी सिंह और शबाना शबनम ने भी अपने गीतों और गजलों से सबको तालियां बजाने पर मजबूर किया। कार्यक्रम के अंत में संयोजक आफाक अली ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।
BARABANKI NEWS
MUSJAIRA
SUKHANDAN
KARWANE MOHABBAT
URDU
ADAB
SUKHANDAN
KARWANE MOHABBAT
URDU
ADAB

0 टिप्पणियाँ