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Barabanki: जिले का VIP काल!

 

वैसे तो बाराबंकी सादगी पसंद जिला है। यहां के लोग वीआईपी कल्चर या दूसरे शब्दों में कहें तो भौकाल से ज्यादा तरजीह सादगी को ही देते हैं। जो लोग यहां भौकाल में रहते भी हैं, तो उन्हें यहां के सादगी पसंद लोग ठेंगे पर ही रखते हैं। मतलब वीआईपी कल्चर की यहां दाल नहीं गलती, लेकिन जिले में साल के एक वक्त में ऐसा दौर जरूर आता है, जब लोग वीआईपी बनने से ज्यादा दिखाने में लग जाते हैं। ये दौर होता है देवा मेला का। देवा मेले के शुरूआत से पहले से ही वीआईपी पास के जुगाड़ में लग जाते हैं। हर कोई अपने-अपने जुगाड़ तलाशने लगता है कि वीआईपी पास मिल जाए और गाड़ी के फ्रंट मिरर की शोभा बढ़ जाए। 

वीआईपी पास सिर्फ प्रतिष्ठा के लिए नहीं लिया जाता। इसकी जेन्यून वजह भी है। वजह दैवा मेला की भौगोलिक स्थित। दरअसल देवा मेला कोई 3 से 4 किलोमीटर की लंबाई में देवा-फतेहपुर मार्ग पर लगता है। जिस स्थान पर मेले के दौरान तमाम प्रोग्राम होते हैं वो काफी दूर पड़ते हैं। इसलिए एक अलग रास्ता बनाकर उनसे वीआईपी लोगों को गुजारा जाता है, ताकि आने-जाने वाले लोगों और दूर दराज से आने वाले वीआईपीज़ को परेशानी का सामना ना करना पड़े। ये तो देवा मेले के वीआईपी पास की जेन्यून वजह है। लेकिन ये भी सच है कि पिछले कुछ सालों में वीआईपी पास भौकाल और प्रतिष्ठा का विषय बना है। लोगों को वीआईपी पास चाहिए ही, चाहे जैसे। यही वजह है कि लोग वीआईपी पास के लिए तरह-तरह के जतन करते हैं। वीआईपी पास के लिए सरकारी कर्मचारियों से सिफारिशें कराई जाती हैं। कुछ खबर नवीस भी इस पास के लिए एडीआई दफ्तर में लगे रहते हैं। कभी सत्ता पक्ष के लोग या नेताओं को भी वीआइपी पास के लिए सिफारिश करनी पड़ती है। 

किसी ना किसी तरह, कोई न कोई जुगाड़ से लोग वीआईपी पास पा ही जाते हैं। पास मिलने के बाद भी कई जतन होते हैं। कुछ लोग तो वीआईपी पास को गाड़ी के फ्रंट पर बिलकुल मढ़ा देते हैं और ये जब तक मढ़ा रहता है, तब तक गाड़ी की सर्विसिंग का वक्त नहीं आ जाता। हर कोई वीआईपी पास के साथ इतना वफादार हो ये भी पक्का नहीं है। कुछ लोगों का पास तो गाड़ी-गाड़ी के शीशों की खाक छानता है, लेकिन इसके बावजूद 10 दिनों तक कार्ड एकदम कड़क और सुपर रिन की चमकार मारता है। ये तो है आम लोगों की बात। देवा मेले के वीआईपी पास के लिए सबसे ज्यादा दुविधा में उन लोगों की गाड़ियों के साथ होती है। जिनकी गाड़ियों में सचिवालय या विधानसभा का पास लगा होता है। ऐसे लोगों के पास देवा मेले के वीआईपी पास लगाने के लिए दुविधा ये होती है कि वो गाड़ी के फ्रंट मिरर पर वीआईपी पास लगाएं कहां? ऊपर या नीचे कभी तो लोग सचिवालय या विधानसभा पास के ऊपर ही लगा देते हैं। 

जिले में वीआईपी पास लगी गाड़ियां कोई 2 महीने तक तो दिख ही जाती है। लोग देवा मेला निकलने के बाद भी इस पास के जरिए काफी दिनों तक भौकाल काटते हैं। यही वह वक्त होता है, जो जिले का वीआईपी का काल होता है। नहीं तो बाकी दिनों में सब सादगी के साथ ही रहते हैं।

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