बाराबंकी जिले में समाजवादी पार्टी की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। पार्टी के नेता इससे लाख इनकार करें लेकिन वक्त-वक्त पर ये सतह पर आ ही जाती है। सिर्फ चुनाव के दरमियान ही ये चर्म पर नहीं होती। आम दिनों में भी ये खीचतान नजर आ जाती है। गुटबाजी की वजह से पार्टी मुखिया से निकटता को भी लेकर होड़ मची रहती है। पार्टी मुखिया से निकटता की और रुतबे की होड़ इस बार पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की पत्नी के निधन पर नजर आई। जब तक सपा मुखिया अखिलेश यादव पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की पत्नी को श्रद्धांजलि देने और उनके परिजनों को ढांढस बंधाने नहीं पहुंचे सपा की दूसरी लॉबियों में रुतबे को लेकर कानाफूसी चलती रही।

दरअसल बेनी प्रसाद वर्मा की पत्नी का निधन पिछले सप्ताह शनिवार को हुआ था। उस दिन से ही ये उम्मीद थी कि सपा अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव शोकाकुल पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचेंगे, लेकिन व्यसतता के चलते अखिलेश यादव पहले दिन नहीं पहुंचे। एक-दो दिन बाद पूरे दिन ये चर्चा रही की अखिलेश यादव आज बाराबंकी में पूर्व केंद्रीय मंत्री के घर आने वाले हैं। इस खबर के बाद क्षेत्र में साफ-सफाई का काम भी तेजी से शुरू कर दिया गया था, लेकिन अखिलेश नहीं पहुंचे। इसके बाद से सपा की दूसरी लॉबियों में सपा मुखिया से निकटता को लेकर कानफूसी शुरू हो गई। अपने-अपने सियासी रुतबे को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। तरह-तरह की बातें होने लगीं। बातें हो भी क्यूं ना हो, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का बाराबंकी से खास लगाव जो है। वो पार्टी नेताओं के बर्थ-डे तक में केक काटने तक पहुंचते हैं। ऐसे में उनका पूर्व केंद्रीय मंत्री की पत्नी के निधन पर ना पहुंचना चर्चा का विषय तो था ही।

इस बीच पार्टी में अलाकमान से निकटता, रसूख और रुतबे को लेकर जमकर चर्चाएं हुईं। कुछ लोगों ने तो यहां तक कयास लगा रहे थे कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री के परिजनों से मिलने आएंगे तक नहीं, क्योंकि उनके परिजनों में बात नहीं है, जो दूसरी जगह है। चर्चाओं का बाजार गुरुवार तक उस वक्त तक गर्म रहा, जब तक सपा अध्यक्ष के बाराबंकी दौरे की खबर नहीं आ गई।इस दौरान सपा नेताओ के व्यवहार से लेकर उनके कामकाज के तरीकों पर जमकर विश्लेषण किया गया। किसी को बताया गया कि वो मिलनसार हैं और किसी को बताया गया कि वो लोगों को ठीक से पहचानते तक नहीं हैं। किसी की प्रशासन में पकड़ है, तो कोई नेता किसी की सुनता तक नहीं है। 5-6 दिनों तक सपा के नेताओं की पूरी स्क्रीनिंग की गई। आखिरकार गुरुवार की शाम सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव बाराबंकी पहुंचे। पार्टी के तमाम नेताओं ने उनकी अगुवाई की। अखिलेश पूर्व केंद्री मंत्री के परिजनों से मिले काफी देर तक उनका दुख बांटा। बाहर खड़े जिले के वरिष्ठ पत्रकार ने भी कहा कि अब कयास लगाने वालों का क्या होगा।
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